नई दिल्ली : देवी दुर्गा के 9 रूपों की उपासना के साथ आज 22 मार्च से हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2080 की शुरुआत हो गई। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर लोगोंं ने घरों में घट स्थापना कर देवी मां से आशीर्वाद के साथ नए साल का स्वागत किया। यों तो दुनिया में कई धर्मों और देशों के लोग अलग-अलग दिन नया साल मनाते हैं लेकिन भारतीय खगोलविदें ने वैज्ञानिक पद्धति से हिंदू नववर्ष के विक्रम संवत का निर्धारण किया। सैकड़ों साल बीत जाने के बाद भी भारतीय काल गणना वर्ष और माह का ही सटीक जबाव नहीं देती, वरन तिथि, ग्रह-नक्षत्र का भी सटीक आकलन करती है। यह कालगणना पूर्णत: विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि एक समय अंग्रेजी कैलेंडर (ग्रिगेरियन कैलेंडर)10 महीनों का होता था। इसके कारण हर वर्ष क्रिसमस का समय बदल जाता था। इसी तरह की गड़बडिय़ों के बाद यूरोपीय देशों ने विक्रम संवत की 12 महीनों की व्यवस्था को स्वीकार किया।
हिन्दू नव वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा मनाते है इसके पिछले कई ऐतिहासिक महत्व है। यह त्योहार पौराणिक दिन से जुड़ा हुआ है इस दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसमें मुख्यतया ब्रह्माजी और उनके द्वारा निर्मित सृष्टि के प्रमुख देवी-देवताओं, यक्ष-राक्षस, गंधर्व, ऋषि-मुनियों, नदियों, पर्वतों, पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों का ही नहीं, रोगों और उनके उपचारों तक का भी पूजन किया जाता है। इसी दिन से नया संवत्सर शुरू होता है। अत इस तिथि को ‘नवसंवत्सर‘ भी कहते हैं।
हिन्दू नव वर्ष मनाने के कई ऐतिहासिक महत्व है जिनकों हम निम्नलिखित कारणों से जान सकते है, जो इस प्रकार हैं-
- इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।
- सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।
- प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।
- शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।
- राजा विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना। विक्रम संवत की स्थापना की ।
- युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।

