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संविधान में निहित समता, समरसता व समानता सर्वोच्च : किशन चौधरी

  • केएमयू ने मनाई भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ

दैनिक उजाला, मथुरा : भारत के संविधान दिवस के उपलक्ष में केएम विश्वविद्यालय में ‘सामाजिक न्याय में संविधान की भूमिका’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। भारतीय संविधान की महत्ता और उसकी विशेषताओं के बारे में विवि के सभी संकायों के छात्र-छात्राओं को जानकारी दी गई। मुख्य अतिथि विवि के कुलाधिपति किशन चौधरी ने कहा आज का दिन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण है क्योंकि आज की तिथि को संविधान निर्माताओं ने राष्ट्र की समता, समरसता व समानता की सर्वोच्चता की दृष्टि से संविधान को अपनाया। संविधान दिवस प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है और यह भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों को संरक्षित करने के महत्व की याद दिलाता है।

सामाजिक न्याय में संविधान की भूमिका विषयक सेमिनार का शुभारंभ कुलाधिपति किशन चौधरी, प्रो. वाइस चांसलर डा. शरद अग्रवाल, रजिस्ट्रार पूरन सिंह, मेडीकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे, एडमिसन प्रभारी प्रमोद कुंतल, डीन डॉ धर्मराज सिंह, डा. सीपी वर्मा डॉ संतोष चतुर्वेदी व नवनीत सिंह ने सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके किया।

प्रो. वाइस चांसलर डा. शरद अग्रवाल ने छात्रों को संविधान के मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों, और नागरिकों के अधिकारों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय संविधान न केवल हमारे देश के लोकतंत्र को मजबूत करता है, बल्कि यह समाज में समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का संदेश भी देता है। संविधान का सम्मान करते हुए सभी को सम्मान दें, बड़ों का आदर करके अच्छा इंसान बन सकोगे। संविधान का अर्थ स्वतंत्रता नहीं बल्कि अपने कर्तव्यों (ड्यूटी) को समझना है। अगर आप संविधान की अवहेलना करते है तो आप कभी भी अच्छा इंसान नहीं बन पायेंगे। हमारे भारतीय संविधान ने हमे आजादी दी है उसका दुरूपयोग नहीं करना चाहिए तथा संविधान का दुरुपयोग करगें तो उसी अनुरूप दंड के भागीदार होंगे।

रजिस्ट्रार डॉ. पूरन सिंह ने कहा कि संविधान दो तरह के होते है, जिसे हमने समझने की आवश्यकता है। संविधान दिवस लोकतांत्रिक आदर्शों को मजबूत करता है, सक्रिय नागरिक भागीदारी और जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करता है।

विवि के मेडीकल प्राचार्य प्रो पीएन भिसे ने कहा कि संविधान हमारे लिए बना है, जिसे हम बदल नहीं सकते, सामाजिक हितों की रक्षा ही संविधान की भूमिका है।

मैनेजमेंट एवं कॉमर्स के डीन डॉ सीपी वर्मा, प्रो जगवीर सिंह, प्रो विनय कुमार ने कहा 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जा रहा है, जो 1949 में भारतीय संविधान को अपनाने की याद दिलाता है, जिसने भारत की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्षता और संप्रभुता की नींव रखी। आज की युवा पीढी का संविधान के प्रति कर्त्तव्य है कि वह संविधान, राष्ट्र-ध्वज, स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों का पालन, एकता व अखन्डता की रक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा, समान मातृत्व की भावना रखना, मिश्रित संस्कृति का संरक्षण, उत्कृष्टता हेतु प्रयास करने पर बल दिया।

विवि के पॉलिटिकल्स साइंस विभाग की छात्रा अंजली ठाकुर, वर्षा, राधिका, सोनम और भावना ने कहा भारतीय संविधान 26 नवम्बर हमारे लिए गर्व का दिन है, हमारे संविधान ने अनेक जातियां धर्म को एक सूत्र में पिरोहा है, सभी को बराबर का अधिकार हर किसी नागरिक को दिया है। हमारा तिरंगा राष्ट्र की धरोहर है, जिसकी हमें रक्षा करनी चाहिए। युवा पीढ़ी को डा भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाये गये संविधान में कानून, अर्थशास्त्र, धर्म तथा सामाजिक मुद्दों की रक्षा की है।

सेमीनार में ज्योति सिसौदिया, वैष्णवी शर्मा, स्मिती, चन्द्रेश कुमार, भूपेन्द्र सिंह, मनीष,डॉ सुनील कुमार सिंह,  प्रो दाऊदयाल शर्मा, डॉ प्रीति पोरवाल, आरके शर्मा, शैलेन्द्र शर्मा, नवनीत सिंह, राजकुमार, एनपी सिसौदिया सहित सैकड़ों की संख्या में विवि के सभी संकायों के प्रोफेसर एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, आभार व्यक्त लिबरल आर्ट्स एवं साइंसेज के डॉ धर्मराज सिंह ने व्यक्त किया।

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