नई दिल्ली : चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और NSA अजीत डोभाल से मुलाकात की। इससे पहले वांग यी ने सोमवार को विदेश मंत्री जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत की थी। चीनी विदेश मंत्री 18 अगस्त को दो दिन के दौरे पर भारत पहुंचे हैं।
वांग यी के दौरे के दौरान चीन भारत को रेयर अर्थ मटेरियल देने को तैयार हो गया है। जुलाई में चीन में इस पर रोक लगा दी थी। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी विदेश मंत्री ने जयशंकर को भरोसा दिया है कि चीन भारत को खाद, रेयर अर्थ मटेरियल और टनल बोरिंग मशीन की सप्लाई करेगा।
वांग यी ने कहा-

दुनिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। फ्री ट्रेड और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत और चीन, जो सबसे बड़े विकासशील देश हैं और जिनकी आबादी मिलकर 2.8 अरब से ज्यादा है, उन्हें जिम्मेदारी दिखाते हुए एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए।

वांग ने भरोसा जताया कि चीन भारत समेत पड़ोसी देशों के साथ मिलकर शांति, सुरक्षा और समृद्धि वाला माहौल बनाने के लिए तैयार है।
पीएम मोदी ने चीनी विदेश मंत्री के साथ मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री वांग यी से मिलकर खुशी हुई। पिछले साल कजान में राष्ट्रपति जनपिंग से मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में लगातार डेवलपमेंट हुआ है।
पीएम मोदी ने आगे कहा-

मैं शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान तियानजिन में होने वाली हमारी अगली मुलाकात का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।
NSA डोभाल से सीमा मुद्दे पर बात
वांग यी ने 19 अगस्त को भारत के NSA अजित डोभाल के साथ सीमा मुद्दे पर बात की। वांग यी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में जो समस्याएं आई हैं, वे दोनों देशों के लोगों के हित में नहीं थीं।
उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच हुई मुलाकात का जिक्र भी किया।
चीनी विदेश मंत्री ने इस मुलाकात को द्विपक्षीय रिश्तों की दिशा तय करने वाली और सीमा विवाद को सुलझाने में नया जोश देने वाली बताया।

यह बैठक भारत-चीन के बीच चल रहे 24वें स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव (SR) लेवल टॉक्स का हिस्सा थी।
वहीं, NSA अजीत डोभाल ने भरोसा जताया कि यह वार्ता भी पिछली वार्ता की तरह सफल रहेगी। उन्होंने कहा,

हमारे प्रधानमंत्री जल्द ही SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होने चीन जाएंगे।
डोभाल ने आगे कहा कि पिछले कुछ समय में रिश्तों में सुधार हुआ है, सीमा पर शांति और स्थिरता बनी हुई है, हमारे द्विपक्षीय संबंध ज्यादा ठोस हुए हैं।
गौरतलब है कि भारत-चीन संबंध 2020 में पूर्वी लद्दाख की तनातनी के बाद बिगड़े थे, लेकिन हाल के महीनों में बातचीत और समझौतों के जरिए रिश्तों में सुधार की कोशिशें तेज हुई हैं।

