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‘बिना मुझसे पूछे बिजली कैसे महंगी की’: UPPCL चेयरमैन पर भड़के ऊर्जा मंत्री; कहा- सरकार को बदनाम करने वाले फैसले ले रहे

उत्तर प्रदेश : ‘आपकी कार्यशैली गैर-जिम्मेदाराना है। आप सरकार को बदनाम करने वाले फैसले ले रहे हैं। बिना मुझे सूचना दिए बिजली का सरचार्ज 10 फीसदी बढ़ा दिया। प्रदेश में आंधी-तूफान जैसे संकट में आप हेडक्वॉर्टर छोड़कर गायब रहे।’ यह तल्ख सवाल यूपी के ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा ने यूपीपीसीएल चेयरमैन आशीष गोयल को लिखे पत्र में पूछा है।

मंत्री ने दावा किया कि जनता पर बढ़े हुए बिजली बिल का बोझ डालने की जानकारी मुझे किसी आधिकारिक फाइल या बैठक से नहीं, मीडिया में चल रही खबरों से मिली। इससे साफ है कि ऊर्जा विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

लखनऊ में विभाीय कामों की समीक्षा बैठक में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा।

लखनऊ में विभाीय कामों की समीक्षा बैठक में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा।

सरचार्ज 10% बढ़ाने से सरकार के खिलाफ माहौल बना

ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा ने चेयरमैन आशीष गोयल को 2 पेज का लेटर लिखकर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। मंत्री ने लिखा कि बिना उनकी सहमति के फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज 10 फीसदी बढ़ा दिया गया। जून के बिल में इसकी वसूली भी शुरू कर दी गई। इतने बड़े फैसले की जानकारी मंत्री तक को नहीं दी गई। इसके चलते मीडिया और सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ नकारात्मक खबरों की बाढ़ आ गई।

संकट के समय हेडक्वॉर्टर से गायब रहे चेयरमैन

मंत्री ने कहा- मई के आखिरी दिनों में आंधी-तूफान ने बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। 28-29 मई को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। लोगों की परेशानी देखते हुए 30 मई को समीक्षा बैठक बुलाई गई। लेकिन, जब मैंने चेयरमैन से संपर्क किया तो पता चला कि वे हेडक्वॉर्टर से बाहर हैं। आखिरकार बैठक ऑनलाइन करनी पड़ी। मंत्री एके शर्मा ने लिखा कि- ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में हेडक्वॉर्टर छोड़ना जनहित के विपरीत और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है। भविष्य में हेडक्वॉर्टर छोड़ने से पहले मुझे अवगत कराएं।

यह यूपीपीसीएल के चेयरमैन आशीष गोयल हैं, जिन पर मंत्री एके शर्मा ने निशाना साधा है।

यह यूपीपीसीएल के चेयरमैन आशीष गोयल हैं, जिन पर मंत्री एके शर्मा ने निशाना साधा है।

कुशल लाइनमैन हटाकर अकुशलों की भर्ती की

मंत्री ने चेयरमैन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अनुभवी और योग्य लाइनमैनों को हटाकर अकुशल लोगों को रखा जा रहा है। ये काम सीधे सरकार को बदनाम करने का है। उन्होंने 7 पुराने पत्रों (13 जून, 16 और 31 जुलाई, 6 और 19 अगस्त, 4 और 8 अक्टूबर, 2025) का हवाला दिया। लिखा कि जाति-धर्म आधारित या भ्रष्टाचार के तहत कुशल कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है।

हाल ही में सहारनपुर के मंडल उपाध्यक्ष अंकुर सैनी के पत्र में उल्लेख किया गया कि बेहट डिविजन में 15 साल से काम कर रहे अनुभवी लाइनमैन सुंदर सैनी को हटाकर नए व्यक्ति को रख लिया गया। मंत्री ने इसकी जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने चेतावनी दी- हजारों कुशल कर्मियों को अभियान चलाकर निकालना तकनीकी, प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से बड़ी समस्या बन चुका है। गर्मी के इस संकट के समय इसका नतीजा जनता भुगत रही है।

यूपीईआरसी ने फिर जारी किया नोटिस

जून के बिजली बिल में 10 फीसदी फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) अधिभार वसूलने के मामले में यूपी विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक को फिर से नोटिस जारी कर चेतावनी दी है। कहा- जिन आंकड़ों पर 10% शुल्क लगाया, उन्हें तत्काल हमारे सामने रखो। आयोग ने साफ किया कि 19 जून तक हर हाल में मांगी गई सारी सूचनाएं, गणनाएं और अभिलेख उपलब्ध कराए जाएं।

1 जून को दिए गए पहले नोटिस में ही आयोग ने कहा था कि UPPCL का आदेश नियमों का उल्लंघन है। उसने एक सप्ताह में यूपीपीसीएल से पूरा ब्योरा मांगा था। यूपीपीसीएल ने तय समय सीमा में जानकारी नहीं दी। उल्टा उसने सॉफ्टवेयर में 10 फीसदी फ्यूल सरचार्ज का डाटा अपडेट कर दिया। मतलब, आम उपभोक्ताओं को ये राशि देनी ही होगी।

10 जून को बिजली की मांग पहुंची 31,894 मेगावाट

यूपी में एक बार फिर बिजली कटौती शुरू हो गई है। तेज गर्मी और उमस की वजह से बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 8 जून को जहां बिजली की मांग 31,678 मेगावाट तक पहुंची थी। वहीं, 10 जून की रात यह बढ़कर 31,894 मेगावाट हो गई, जो अब तक की सबसे ज्यादा है।

प्रदेश के कई इलाकों में आंधी-तूफान के चलते भी बिजली कटौती की समस्या बनी है। ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि बिजली व्यवस्था सुधारने का पूरा प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अधिकारियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।

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