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संस्कृति विवि में विशेषज्ञों ने बताया ‘साफ्ट स्किल्स’ सफलता का मंत्र

मथुरा : आज के गलाकाट प्रतिस्पर्धा वाले युग में केवल किताबी ज्ञान या तकनीकी डिग्रियां सफलता की गारंटी नहीं हैं। कॉरपोरेट जगत में वही छात्र लंबी रेस का घोड़ा साबित होता है जिसके पास प्रभावी संवाद कौशल, आत्मविश्वास और बेहतर व्यवहारिक ज्ञान है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी द्वारा “हाउ टू मास्टर सॉफ्ट स्किल्स” विषय पर एक उपयोगी कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कैप्स के निदेशक डा.रजनीश त्यागी ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक सुलझा हुआ व्यक्तित्व और बेहतर संवाद कौशल ही आपको भीड़ से अलग बनाता है। उन्होंने छात्रों को निरंतर आत्म-सुधार के लिए प्रेरित किया। इसके पश्चात डीन एसओएमसी डॉ. गंगाधर हुगर ने प्रबंधन के क्षेत्र में व्यवहारिक ज्ञान और टीम वर्क की महत्ता पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला का समन्वय और संचालन सुश्री शुभांगी सक्सेना (असिस्टेंट प्रोफेसर एवं हॉस्पिटैलिटी ट्रेनर) द्वारा किया गया, जो स्वयं एक प्रमाणित लाइफ कोच भी हैं। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आज के प्रतिस्पर्धी जॉब मार्केट में आत्मविश्वास निर्माण, प्रभावी संचार और पारस्परिक व्यवहार का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनियां अब केवल यह नहीं देखतीं कि आपको क्या आता है, बल्कि यह देखती हैं कि आप अपनी बात को दूसरों तक कैसे पहुंचाते हैं और टीम में कैसे काम करते हैं। सत्र के दौरान उन्होंने इंटरएक्टिव प्रेजेंटेशन, आइस-ब्रेकिंग गतिविधियों और आत्म-चिंतन अभ्यासों के माध्यम से छात्रों को उनकी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया।

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लगभग 100 से ज्यादा छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय के गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने छात्रों को समझाया कि कैसे एक सकारात्मक दृष्टिकोण और बॉडी लैंग्वेज उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।
कार्यक्रम में अर्पणा गुप्ता (सीनियर सॉफ्ट स्किल ट्रेनर) और सुश्री दिव्या गहलोत (सॉफ्ट स्किल ट्रेनर) ने भी अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने प्रोफेशनल एटिकेट (पेशेवर शिष्टाचार) और व्यक्तित्व विकास पर व्यावहारिक जानकारी देते हुए बताया कि कैसे छोटी-छोटी बातें, जैसे हाथ मिलाने का तरीका, बोलने का लहजा और सुनने की क्षमता, एक प्रोफेशनल की छवि बदल सकती हैं।

कार्यशाला के अंत में होटल मैनेजमेंट विभाग के अध्यक्ष रतिश शर्मा ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में अतिथियों और प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान डीन एकेडमिक्स डॉ. रैणु गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे।

कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जहाँ छात्रों ने विशेषज्ञों से अपनी शंकाओं का समाधान किया। छात्रों ने माना कि इस सत्र के बाद वे अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में सीखे गए कौशल को लागू करने के लिए अधिक प्रेरित और आत्मविश्वासी महसूस कर रहे हैं।

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