- जीएलए विश्वविद्यालय में बनेगा भविष्य का एआई इकोसिस्टम, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल का सहयोग
दैनिक उजाला, मथुरा: शिक्षा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने माइक्रोसॉफ्ट और गूगल क्लाउड जैसी विश्व की अग्रणी तकनीकी कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक सहयोग स्थापित किया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण, शोध और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करेगी।
जीएलए विश्वविद्यालय अब देश का पहला “माइक्रोसॉफ्ट जेनएआई कैंपस” बनने जा रहा है, जबकि उत्तर भारत का पहला “गूगल क्लाउड एजेंटिक कैंपस” बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन सहयोगों के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षा, शोध, प्रशासन और नवाचार की पूरी व्यवस्था को अत्याधुनिक एआई तकनीकों से जोड़ा जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह पहल केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की उस शिक्षा व्यवस्था की नींव है, जहां विद्यार्थी पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक उद्योग आधारित एआई तकनीकों, ऑटोमेशन, मशीन लर्निंग और डिजिटल इनोवेशन के वातावरण में सीख सकेंगे।
माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से विश्वविद्यालय में बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विद स्पेशलाइजेशन इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग कार्यक्रम को नई तकनीकी दिशा मिलेगी। विद्यार्थियों को जेनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग, डेटा इंटेलिजेंस और आधुनिक कंप्यूटिंग तकनीकों का उद्योग आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थी केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि वैश्विक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप भी तैयार होंगे।
वहीं गूगल क्लाउड के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में एआई एजेंट्स, लो-कोड और नो-कोड तकनीकों, स्मार्ट ऑटोमेशन और डिजिटल उत्पादकता आधारित कार्यप्रणालियों को बढ़ावा मिलेगा। विश्वविद्यालय समुदाय के हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को गूगल जेमिनी एंटरप्राइज और गूगल वर्कस्पेस फॉर एजुकेशन जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके माध्यम से शिक्षण, शोध, प्रोजेक्ट डेवलपमेंट, डिजिटल सहयोग और प्रशासनिक कार्य अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और प्रभावी बनेंगे। विश्वविद्यालय में डिजिटल लर्निंग को मजबूत बनाने के लिए उन्नत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, लाइव स्ट्रीमिंग, क्लाउड स्टोरेज, वर्चुअल सहयोग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे विद्यार्थी और शिक्षक वैश्विक स्तर की डिजिटल शिक्षा प्रणाली का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
इन वैश्विक सहयोगों के अंतर्गत जीएलए विश्वविद्यालय परिसर में माइक्रोसॉफ्ट और गूगल के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित अत्याधुनिक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को एआई, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, स्मार्ट ऑटोमेशन, डेटा प्रोसेसिंग और उद्योग आधारित नवाचारों पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे वैश्विक तकनीकी साझेदारों के सहयोग से विकसित हो रहा यह एआई इकोसिस्टम विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और वैश्विक काॅम्पटीशन के लिए तैयार करेगा।
एआई तकनीक हर क्षेत्र की कार्यप्रणाली को बदलने वाली
जीएलए के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जीएलए विश्वविद्यालय हमेशा से विद्यार्थियों को भविष्य उन्मुख और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ यह सहयोग विश्वविद्यालय को नवाचार, शोध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान देगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई तकनीक हर क्षेत्र की कार्यप्रणाली को बदलने वाली है और जीएलए विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को उसी भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। यह साझेदारी विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता और नए अवसर प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगी।
जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि यह उपलब्धि केवल विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे जीएलए परिवार के सामूहिक प्रयासों और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से एआई आधारित भविष्य की ओर बढ़ रही है और ऐसे समय में शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करें।
प्रो. गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसा समग्र शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां तकनीक शिक्षण, शोध, नवाचार और व्यक्तित्व विकास का सक्रिय माध्यम बने। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे वैश्विक तकनीकी साझेदारों के साथ यह सहयोग विद्यार्थियों को नई संभावनाएं, वैश्विक अवसर और भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रदान करेगा।
आइईटी डीन प्रो. अशोक भंसाली ने सभी विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एआई आधारित संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाला समय उन संस्थानों का होगा जो नवाचार, तकनीक और शोध को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाएंगे। जीएलए विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि न केवल मथुरा और उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन और एआई आधारित शिक्षा के नए युग की शुरुआत के रूप में भी देखी जा रही है।

