नई दिल्ली : ईरान पर यूएस-इजरायल पर हमले के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते पर तनाव बना हुआ है और दुनिया में तेल को लेकर गंभीर चिंता देखी जा रही है। इस बीच अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की बात कही, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। इस मामले पर अब सरकार ने प्रतिक्रिया दी है।
केंद्र सरकार ने शनिवार को साफ कहा है कि भारत को जहां से भी सस्ता तेल मिलेगा वहीं से खरीदेगा। सरकार ने यह भी कहा कि रुकावटों के बावजूद भारत की एनर्जी सप्लाई सुरक्षित बनी हुई है।
क्या कहा केंद्र सरकार ने?
बयान जारी करते हुए सरकार ने कहा, “होर्मुज रूट पर तनाव बढ़ने के बाद भी भारत की एनर्जी सप्लाई सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है। भारत ने अपने कच्चे तेल के सोर्स को 27 से 40 देशों तक अलग-अलग कर दिया है, जिससे कई दूसरे सप्लाई रूट पक्के हो गए हैं। देश के हित में भारत उन जगहों से तेल खरीदता है जहां सबसे अच्छे और सस्ते रेट मिलते हैं।”
भारत ने शनिवार को यह भी पुष्टि की कि अमेरिका से मिली टेम्पररी छूट के बाद वह रूस से तेल इंपोर्ट करना जारी रखेगा। यह छूट मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से दी गई थी। केंद्र ने कहा है कि नई दिल्ली को ऐसी खरीदारी के लिए किसी भी देश से परमिशन की जरूरत नहीं है।
‘किसी की इजाजत पर निर्भर नहीं’
केंद्र ने कहा, “भारत ने रूसी तेल खरीदने के लिए कभी किसी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं रहा है। भारत फरवरी 2026 में भी रूस से तेल इंपोर्ट कर रहा है और रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल तक भारत यूएस और ईयू के एतराज के बावजूद रूस से तेल खरीदता रहा। 2022 के बाद डिस्काउंटेड कीमतों और रिफाइनरी की डिमांड की वजह से इंपोर्ट में काफी बढ़ोतरी हुई।”
केंद्र के अनुसार, भारत के पास रिजर्व और सप्लाई चेन में 250 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट हैं। यह सात या आठ हफ्ते की खपत के बराबर बफर देता है। भारत की कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी 258 मिलियन मीट्रिक टन सालाना है, जो मौजूदा घरेलू डिमांड से ज्यादा है।
ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायल की मिलिट्री कार्रवाई और खाड़ी में तेहरान के जवाबी हमलों ने दुनिया भर में एनर्जी फ्लो और शिपिंग रूट में रुकावट डाली है, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।

