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जिस चायवाले के यहां छापा पड़ा, अखिलेश ने उसे बुलाया:पीतल का भगोना दिया; कहा-मेरे पास भी एल्युमिनियम के बर्तन, घर सील कर दें

लखनऊ : फतेहपुर में जिस चाय की दुकान पर छापेमारी की गई, उस चायवाले को सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी दफ्तर बुलाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- चायवाले को परेशान कर रहे हैं। एक मुस्लिम समुदाय के नेता को आगे करके मारपीट कराई, ताकि केस बन सके। छापेमारी करवा रहे हैं।

आरोप ये है कि एल्युमिनियम के बर्तन में चाय बन रही है। दुकान सील करने की बात कर रहे हैं। जो अजय सिंह बिष्ट का सबसे खास हो, मेरे साथ चले, देख ले, हमारे घर में भी एल्युमिनियम के बर्तन हैं। मेरा घर भी सील कर दें। जब इन्होंने शंकराचार्य को नहीं छोड़ा तो बाकी की बात ही छोड़ दी जाए।

दरअसल, फतेहपुर में एक चाय की दुकान पर फूड सेफ्टी विभाग ने छापेमारी की थी। चाय के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे। इस दुकान पर 2 महीने पहले अखिलेश चाय पीने के लिए गए थे। इस वजह से छापेमारी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस पर अखिलेश ने ‘X’ पर पोस्ट किया। लिखा- मत डरिए, अपना काम करिए। बुरे दिन जाने वाले हैं।

अखिलेश यादव ने फतेहपुर में चाय की दुकान चलाने वाले शेषमन के बेटे आर्यन यादव को सपा दफ्तर बुलाया।

अखिलेश यादव ने फतेहपुर में चाय की दुकान चलाने वाले शेषमन के बेटे आर्यन यादव को सपा दफ्तर बुलाया।

सरकार में बने रहने का कोई हक नहीं

अखिलेश ने कहा- आज बहुत ही शुभ दिन है। हम लखनऊ वाले हैं। इसीलिए कहा कि पहले आप। एक लंबी प्रेस कांफ्रेंस आपने सुनी है। टीवी प्रसारण भी सुना आपने। आज हम ऐतिहासिक जीत के मौके पर मिल रहे हैं, जब परिसीमन बिल पास नहीं हो पाया है। संसद में हार का मतलब होता है कि जनता का विश्वास खो चुकी है। सरकार में बने रहने का कोई हक नहीं है। भाजपा के लोग डर दिखाते हैं। समाज में विभाजन करते हैं। अपना उल्लू सीधा करते हैं। भाजपाई सत्ता पाने और बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। भाजपाइयों का सीएमएफ फॉर्मूला (क्रिएट, मिस्टिरियल और फीयर) पिट चुका है। इनकी चाल अब नहीं चलेगी। भाजपा की हार शुरू हो चुकी है। महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। आज के नए विचार वाली नारी हराएंगी।

आज की नारी इनके बहकावे में नहीं आएगी

उन्होंने कहा- बीजेपी पुरानी सोच की महिलाओं को अपनी ओर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज की नारी इनके बहकावे में नहीं आएगी। इनकी महिलाओं के बारे में सोच सामंती है। नारी को कमजोर रखो, इन्हें अधिकार न दो.. न सोच विचार का, न पहनावे का। जनता के बढ़ते विरोध से ध्यान हटाने के लिए लाए गए बिल की हार भाजपा की हार है। ये लोगों को ठगना चाहती थी। इस जीत का प्रतिनिधित्व देश का विपक्ष कर रहा है।

नारी के अधिकार का हरण करने के लिए आया था

अखिलेश ने कहा- परिसीमन के नाम पर ये रूप बदल कर नारी के अधिकार का हरण करने के लिए आया था। ये महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि उनकी शक्ति को कम करने की योजना थी। ये बिल नहीं था, भाजपा की दरार वादी राजनीति का काला दस्तावेज था। पिछड़ों की आबादी 66 प्रतिशत भी मान ली जाए तो 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए थी। लेकिन ये 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दे नहीं रहे थे, छीन रहे थे। दरअसल महिला आरक्षण बिल का आधार ही निराधार था।

ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बिल लाया गया

उन्होंने कहा- आज हर तरफ महिलाओं के शोषण की खबरें आ रही हैं। इससे ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बिल लाए जा रहा हैं। हमारी आपत्ति यही थी कि पहले जनगणना कराई जाए फिर आरक्षण दिया जाए। महिलाओं के साथ छलावा हम नहीं होने देंगे। यही महिला तुष्टीकरण है। प्रधानपति की तरह सांसद पति की अवधारणा भी चल पड़ती। संसद में जो सरकार हार जाती है वह बाहर जाती है। जनता को विश्वास हो गया है कि बुरे दिन जाने वाले हैं।

आरक्षण नहीं, नारी को नारा बनाना था

अखिलेश ने कहा- रात को जब हमें आपको पता चला कि बहुत बड़ा अनाउसमेंट होने जा रहा है तो मुझे लगा कि पीएम पद के लिए किसी महिला का नाम सामने आ सकता है। उन्हें आरक्षण नहीं, नारी को नारा बनाना था। उसके सहारे हमें आपको धोखा देना था। अभी जो प्रेस कांफ्रेंस हो रही है, उसके मुखिया का भी एक वीडियो मिला। इसमें तब क्या कह रहे हैं महिला आरक्षण बिल पर, जब वो सत्ता में नहीं थे। वो भी देखना चाहिए। आधी आबादी की बात हो रही है, तो उसमें सबको सम्मान मिलना चाहिए।

टीएमसी, डीएमके, कांग्रेस के लोग प्रचार न कर सके, इसलिए सदन बुलाया

उन्होंने कहा- रंग जो होता है वह किसी न किसी धर्म से जुड़ा होता है। लाल रंग क्रांति के साथ-साथ हमारी देवियों का भी रंग है, दुल्हन का भी रंग लाल होता है। संसद का सत्र इसलिए बुलाया गया था कि टीएमसी, डीएमके, कांग्रेस के लोग प्रचार न कर सकें, जिससे उनकी जमानत न जब्त होने पाए। पूर्व सांसद स्मृति ईरानी के गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती पर कहा कि मैं कन्नौज का नाम बदलकर गोरखपुर कर दूंगा। गोरखपुर का नाम गोरखधंधा कर दूंगा।

अखिलेश ने आर्यन को पीतल का भगोना गिफ्ट किया। कहा- डरना नहीं है। बुरे दिन जाने वाले हैं।

अखिलेश ने आर्यन को पीतल का भगोना गिफ्ट किया। कहा- डरना नहीं है। बुरे दिन जाने वाले हैं।

चाय की दुकान पर छापेमारी की पूरी कहानी समझते हैं…

फतेहपुर में चाय की दुकान के मालिक शेषमन यादव ने बताया था कि गुरुवार 16 अप्रैल को फूड सेफ्टी विभाग के अफसर और कर्मचारी आए। चाय के सैंपल लिए। पूछा कि एल्युमिनियम के बर्तन में चाय क्यों बनाते हो? उन्होंने आरोप लगाया था कि अखिलेश भैया के आने के बाद से ही परेशान किया जा रहा है। जीना मुश्किल कर दिया है। एल्युमिनियम के नहीं तो अब क्या सोने-चांदी के बर्तन में चाय बनाएं।

चाय की दुकान पर छापेमारी पर खाद्य निरीक्षक धीरेंद्र दीक्षित ने कहा था-

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अहमद नामक व्यक्ति ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। कहा था कि दुकान पर चाय बनाने में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। उसी शिकायत के आधार पर टीम ने जांच की। चाय का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है।QuoteImage

20 फरवरी को अखिलेश यादव ने शेषमन की दुकान पर चाय पी थी।

20 फरवरी को अखिलेश यादव ने शेषमन की दुकान पर चाय पी थी।

अखिलेश ने पी थी शेषमन की चाय, पूछा था- कौन सी पत्ती डालते हो?

  • अखिलेश इसी साल 20 फरवरी को फतेहपुर दौरे पर थे। वह खागा तहसील के अफोई गांव में पूर्व विधायक मोहम्मद शफीर के आवास पर मुलाकात करने पहुंचे। वहां से लौटते समय जब उनका काफिला खागा में चौकी चौराहा पहुंचा, तो उन्होंने चाय पीने की इच्छा जताई थी।
  • अखिलेश के साथ चल रहे सपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें बताया कि शेषमन चाय वाले की दुकान काफी प्रसिद्ध है। इसके बाद अखिलेश शेषमन की दुकान पर पहुंचे। शेषमन के बेटे आर्यन यादव ने खुद अखिलेश यादव को कुल्हड़ वाली चाय बनाकर पिलाई थी। अखिलेश ने एक नहीं, बल्कि दो कुल्हड़ चाय पी।
  • अखिलेश ने चाय की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल से आर्यन के साथ चाय पीते तस्वीर और वीडियो शेयर किया था। इसमें अखिलेश आर्यन से पूछते हुए नजर आ रहे हैं कि कौन सी पत्ती है। कितनी चीनी है। अखिलेश के चाय पीने के बाद से शेषमन की दुकान इलाके में चर्चा में आ गई थी।
16 अप्रैल को फूड विभाग की टीम दुकान पहुंची और वहां पर चाय के सैंपल लिए।

16 अप्रैल को फूड विभाग की टीम दुकान पहुंची और वहां पर चाय के सैंपल लिए।

क्या फतेहपुर में किसी चाय की दुकान पर पहले भी छापेमारी हुई है?

फतेहपुर में फूड सेफ्टी विभाग ने क्या इससे पहले भी चाय की किसी दुकान में छापेमारी की है। इस पर विभाग के अफसरों से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि चेक करके यह बता पाएंगे। हालांकि, विभाग के सूत्र बताते हैं कि इससे पहले जिले में चाय की दुकान पर छापेमारी नहीं की गई। विभाग ज्यादातर वक्त मिठाई की दुकानों या रेस्टोरेंट में ही छापेमारी करता है।

जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

फूड निरीक्षक धीरेंद्र दीक्षित का कहना है-

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सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर मानक पूरे नहीं पाए गए तो दुकान को सीज भी किया जा सकता है। फिलहाल जांच जारी है।QuoteImage

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