Breaking
Tue. Jun 16th, 2026

रिपोर्ट- 2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर: 40% कंपनियों में डिग्री+AI वालों को तवज्जो; चीन ने 12000 डिग्रियां खत्म कीं, एआई कोर्स शुरू

नई दिल्ली : देश में आईटी, कानून, कॉमर्स,ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं।

एचआर कंपनी टीमलीज का कहना है कि 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 82% बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, नौकरियां उन लोगों के पास रहेंगी, जो AI टूल का इस्तेमाल करके उत्पादकता यानी प्रोडक्टिविटी 40% तक बढ़ा सकते हैं।

आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट कहती है कि AI लोगों की जगह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग AI का उपयोग करते हैं, वे उनकी जगह ले लेंगे, जो इस्तेमाल नहीं करते। ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2030 तक 22% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

इधर, चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।

चीन ने 12 हजार डिग्रियां खत्म कीं, AI कोर्स शुरू

चीन ने 4 साल में अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से ज्यादा अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम को खत्म या सस्पेंड कर दिया, जबकि करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।

इनमें से कई कटौतियां कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और प्रबंधन पर केंद्रित थीं। इसकी वजह ये है कि चीन सरकार विश्वविद्यालयों पर AI, सेमीकंडक्टर्स, रोबोटिक्स और अन्य रणनीतिक उद्योगों के लिए प्रतिभाएं तैयार करने का दबाव बना रही है।

भारत में कर्नाटक सरकार ने 1300 कोर्स की सीटें घटाईं

भारत में फिलहाल कर्नाटक सरकार ने कम दाखिले और अन्य कारकों का हवाला देते हुए शैक्षणिक 2026-27 के लिए सरकारी कॉलेजों में 458 बीए, बीएससी, बीकॉम में कॉम्बिनेशन्स को बंद कर दिया है। वहीं, 1,300+ कोर्स में सीटें घटा दीं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *