- देश के आईआईटी संस्थानों में हर पांच में से दो पद खाली हैं, सबसे खराब हालत पटना और खड़गपुर में है
दैनिक उजाला, एजुकेशन डेस्क : देश के आईआईटी संस्थानों में बड़े पैमाने पर पद खाली हैं और इन सभी पदों पर नए लोगों की भर्ती करने में भी समय लगेगा। आईआईटी काउंसिल के डेटा और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार देश के 23 आईआईटी संस्थानों में कुल 12,498 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं और इनमें से 4,804 पद खाली हैं। कुल 38 फीसदी पद खाली हैं। इसका मतलब है कि हर पांच में से दो पद खाली हैं। एक तरफ आईआईटी संस्थान अपने कैंपस का विस्तार कर रहे हैं। ज्यादा छात्रों को एडमिशन दे रहे हैं और नए कोर्स शुरू कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ इतने बड़े पैमाने पर पदों का खाली होना परेशानी बढ़ाने वाला है।
धारवाड़ और पालक्कड़ में बने आईआईटी संस्थानों की स्थिति सबसे बेहतर है। धारवाड़ में केवल 1 फीसदी पद खाली हैं। वहीं, पालक्कड़ में यह आंकड़ा 5 फीसदी है।
किस आईआईटी में कितने पद खाली
आईआईटी पटना (54.6%)
आईआईटी खड़गपुर (51.3%)
आईआईटी कानपुर (39%)
आईआईटी बॉम्बे (38.4%)
आईआईटी दिल्ली (38.3%)
आईआईटी मंडी (39.9%)
आईआईटी धनबाद (48.4%)
आईआईटी गोवा (45.8%)
आईआईटी गुवाहाटी (42.2%)
रिसर्च पर पड़ रहा असर
देश के आईआईटी संस्थानों में छात्रों की कुल संख्या1.35 लाख से ज्यादा है, लेकिन फैकल्टी की कमी के कारण शिक्षण और रिसर्च दोनों पर असर पड़ रहा है। आईआईटी डायरेक्टर्स के अनुसार ग्लोबल मार्केट में टॉप पीएचडी होल्डर्स के बीच भारी प्रतिस्पर्धा है। विदेशी यूनिवर्सिटी, बड़ी कंपनियां, रिसर्च लैब्स और डीप-टेक स्टार्टअप्स में ऐसे लोगों को अच्छे पदों पर नौकरी मिल रही है। इस वजह से कई लोग आईआईटी की बजाय इन जगहों पर काम करना पसंद करते हैं। इसके अलावा आईआईटी में चयन का पैमाना भी बेहद सख्त है। बेहद सख्त चयन प्रक्रिया के कारण उपयुक्त उम्मीदवार मिलने तक पद खाली रखे जाते हैं। वहीं, एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे विषय नए हैं। इनमें योग्य शिक्षकों की कमी है।
भर्ती के लिए प्रयास कर रहे संस्थान
कई आईआईटी संस्थानों ने रोलिंग एडवरटाइजमेंट, स्पेशल रिक्रूटमेंट ड्राइव और मिशन मोड हायरिंग शुरू कर दी है। आईआईटी खड़गपुर ने अक्टूबर 2025 से 215 से ज्यादा फैकल्टी सिलेक्शन पूरे किए हैं। आईआईटी मद्रास ने 1,100 स्वीकृत पदों में से 411 खाली बताए हैं और विसिटिंग/एडजंक्ट फैकल्टी के सहारे काम चला रहा है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार वैकेंसी एक निरंतर प्रक्रिया है (रिटायरमेंट, इस्तीफा, प्रमोशन के कारण)। संस्थानों को साल भर भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, संसद में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में संस्थानवार आंकड़े नहीं दिए गए थे।
रिजर्वेशन वाले कितने पद खाली?
9 आईआईटी ने जाति-आधारित वैकेंसी डेटा दिया। इनमें एससी, एसटी और ओबीसी पदों की कुल 1,501 वैकेंसी में से करीब 60% आरक्षित श्रेणियों के हैं। ओबीसी में सबसे ज्यादा (477) खाली पद हैं। फैकल्टी की कमी आईआईटी की विस्तार योजनाओं और रिसर्च आउटपुट पर असर डाल रही है। आईआईटी में 2028-29 तक 6,500 सीटें बढ़ाने का प्लान है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक यह अच्छी शिक्षा और नवाचार को प्रभावित कर सकता है। इस पर आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा, “सवाल यह नहीं है कि भारत विश्व स्तरीय प्रतिभा आकर्षित कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि हम प्रतिभा के लिए दुनिया का सबसे रोमांचक माहौल बना पाते हैं या नहीं।” वहीं, आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने कहा कि यह नई समस्या नहीं है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले पीएचडी उम्मीदवारों की कमी बनी हुई है।। आईआईटी लगातार भर्ती के प्रयास तेज कर रहे हैं, लेकिन सख्त मानकों को बनाए रखते हुए पूर्ण भर्ती में समय लगेगा।

