- कांग्रेस नेता नाना पटोले ने BJP- RSS पर राम मंदिर और बद्रीनाथ समेत कई बड़े मंदिरों के दान में हेराफेरी का सनसनीखेज आरोप लगाया है
मुंबई : राम मंदिर दान घोटाला मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में आरएसएस की भी भूमिका है और संगठन के शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक इस पर सवालों के घेरे में हैं।
धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
नाना पटोले ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े दान को लेकर जनता की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ किया गया है। उनके अनुसार, यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक और वैचारिक मानसिकता काम कर रही है, जिसका प्रतिनिधित्व बीजेपी और आरएसएस करते हैं। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा जो भी व्यक्ति या संगठन दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
SIT जांच पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने एसआईटी (SIT) जांच प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी जांचों के जरिए असली दोषियों को बचा लिया जाता है और केवल कुछ व्यक्तियों को ही जिम्मेदार ठहराकर मामला समाप्त कर दिया जाता है। पटोले ने जोर देकर कहा कि यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई तो यह जनता के भरोसे के साथ एक और बड़ा धोखा होगा।
अन्य धार्मिक स्थलों का भी किया उल्लेख
अपने बयान में नाना पटोले ने केवल अयोध्या राम मंदिर ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड स्थित बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर और पंढरपुर मंदिर से जुड़े मामलों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे और दान की राशि के दुरुपयोग के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसके दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
राजनीतिक घमासान जारी
इस पूरे मामले को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं, जिससे यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। राम मंदिर दान घोटाले को लेकर चल रही यह बहस अब केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है, जिसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

