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Wed. Aug 5th, 2026

आधुनिक शोध और तकनीक से सशक्त जीएलए का बायोटेक्नोलॉजी विभाग

  • जीएलए का बायोटेक्नोलॉजी विभाग आधुनिक शोध, वैश्विक अवसर और शानदार करियर का भरोसेमंद मंच

दैनिक उजाला, मथुरा : स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच बायोटेक्नोलॉजी आज दुनिया के सबसे तेजी से विकसित होते विषयों में शामिल है। जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जीन एडिटिंग, वैक्सीन विकास और प्रिसिजन मेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों ने इस क्षेत्र में करियर की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। ऐसे समय में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा का बायोटेक्नोलॉजी विभाग आधुनिक प्रयोगशालाओं, उच्चस्तरीय शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उद्योगोन्मुख शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर के अवसरों के लिए तैयार कर रहा है।

बायोटेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए आज फार्मास्यूटिकल उद्योग, वैक्सीन निर्माण, हेल्थकेयर, क्लीनिकल रिसर्च, डायग्नोस्टिक्स, कृषि, फूड इंडस्ट्री, पर्यावरण संरक्षण, फॉरेंसिक साइंस, बायोइन्फॉर्मेटिक्स तथा अनुसंधान संस्थानों में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं। विद्यार्थी गेट, सीएसआईआर-यूजीसी नेट, डीबीटी-बीईटी, आईसीएमआर-जेआरएफ तथा आईसीएआर जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के माध्यम से उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट करियर बना सकते हैं।

विभाग की सबसे बड़ी विशेषता इसका मजबूत अनुसंधान वातावरण और अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं हैं। विद्यार्थियों को मॉलिक्यूलर बायोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, सेल एवं टिश्यू कल्चर, प्लांट बायोटेक्नोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, ड्रग डिस्कवरी तथा बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसी आधुनिक प्रयोगशालाओं में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही रियल-टाइम पीसीआर, एलिसा रीडर, जैल डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम, नैनोड्रोप स्पेक्ट्रोफोटोमीटर तथा बायोसेफ्टी कैबिनेट जैसे आधुनिक उपकरणों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाता है। नए शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को क्रिस्पर-कास9 जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य की अत्याधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी तकनीकों से परिचित हो सकें।

अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में भी विभाग लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। पिछले तीन वर्षों में विभाग के शिक्षक एवं शोधार्थी 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। विभाग को 2 पेटेंट प्राप्त हुए हैं, जबकि 5 पेटेंट आवेदन प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा आईसीएमआर, एएनआरएफ, डीबीटी, आईसीएआर, बीआईआरएसी, एनआरडीसी, यूपीसीएसटी तथा अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) जैसी संस्थाओं से 17 शोध परियोजनाओं के माध्यम से 5 करोड़ रुपये से अधिक का बाह्य शोध अनुदान प्राप्त हुआ है, जिससे विद्यार्थियों को अत्याधुनिक अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य करने का अवसर मिल रहा है।

विभाग ने देश और विदेश के 42 संस्थानों के साथ एमओयू स्थापित किए हैं, जिससे विद्यार्थियों को प्रशिक्षण, शोध और शैक्षणिक सहयोग के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभाग के शोधकर्ता लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी तथा यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन के साथ कोलैबोरेटिव रिसर्च पर कार्य कर रहे हैं। विभाग के विद्यार्थी जर्मनी, फिनलैंड और मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने शोध प्रस्तुत कर चुके हैं, जबकि एक शोधार्थी वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत शोध कार्य कर रही हैं।

प्लेसमेंट 50 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत

प्लेसमेंट के क्षेत्र में भी विभाग का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। विभाग के अनुसार पिछले तीन वर्षों में प्लेसमेंट 50 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंचा है। विद्यार्थियों का चयन क्रायोवीवा बायोटेक, लाइफसेल इंटरनेशनल, आईजीन लैबसर्व, एडजीन बायोमेड, बायो-स्टेट कंसल्टिंग, हेक्सा हेल्थ, प्रेमास बायोटेक तथा नेक्स्टजेन इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है। इससे विद्यार्थियों को उद्योग जगत में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का उत्कृष्ट अवसर मिल रहा है।

डा. अंजना गोयल

एसोसिएट विभागाध्यक्ष डा. अंजना गोयल ने कहा बायोटेक्नोलॉजी केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि भविष्य की विज्ञान और तकनीक का आधार है। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे आधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें। जीएलए विश्वविद्यालय का बायोटेक्नोलॉजी विभाग बीटेक बायोटेक, बीएससी बायोटेक, बीएससी बायोटेक (ऑनर्स/रिसर्च), एमएससी बायोटेक, एमएससी माइक्रोबायोलॉजी तथा पीएचडी बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक एवं उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रम संचालित हैं।

डा. हिमांशु गुप्ता

इंचार्ज डा. हिमांशु गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें शोध, नवाचार और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना है। बायोटेक्नोलॉजी विभाग में उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शोध संस्कृति विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाती हैं तथा उन्हें देश और विदेश में उत्कृष्ट करियर के अवसर प्रदान करती हैं।

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