दैनिक उजाला, मथुरा/महावन : महावन तहसील में आय, जाति, निवास एवं अन्य प्रमाण पत्रों के आवेदनों के निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्राम अमीरपुर के कई आवेदकों का आरोप है कि संबंधित लेखपाल बिना स्थलीय जांच किए, बिना आवेदकों से संपर्क किए और बिना दस्तावेजों की कमियां स्पष्ट किए लगातार आवेदन निरस्त (रिजेक्ट) कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन निरस्त करते समय केवल “अपूर्ण दस्तावेज” अथवा “अपठनीय दस्तावेज” जैसी टिप्पणी दर्ज कर दी जाती है। न तो आवेदकों को फोन कर जानकारी दी जाती है और न ही यह बताया जाता है कि आखिर दस्तावेज में कमी क्या है। इससे लोगों को बार-बार जनसेवा केंद्र और तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ग्राम अमीरपुर निवासी रूबी और प्रमोद ने बताया कि उन्होंने जुलाई माह में आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किए थे। उनका आरोप है कि हर बार एक ही कारण बताकर आवेदन निरस्त कर दिए गए। यदि दस्तावेजों में कोई कमी थी तो उन्हें सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए था, लेकिन उनसे एक बार भी संपर्क नहीं किया गया।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कई मामलों में वास्तविक आवेदक से जानकारी लेने के बजाय गांव के अन्य लोगों से पूछताछ के आधार पर रिपोर्ट लगा दी जाती है। उनका कहना है कि इससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार आवेदन निरस्त होने के बावजूद महावन तहसील के एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर भी मामले की समीक्षा नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि किसी क्षेत्र से बार-बार आवेदन खारिज हो रहे हैं तो प्रशासन को इसकी जांच कर संबंधित अधिकारी से जवाब-तलब करना चाहिए।
लेखपाल शैलेंद्र का पक्ष
इस संबंध में जब हथोड़ा क्षेत्र के लेखपाल शैलेंद्र से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह इस क्षेत्र में नए नियुक्त हुए हैं, इसलिए शुरुआती दिनों में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदक का आवेदन निरस्त हुआ है और उसे कोई समस्या है तो वह सीधे उनसे संपर्क करे। आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा आवेदन करने पर नियमानुसार उसका निस्तारण कराया जाएगा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि निरस्त किए गए आवेदनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी प्रमाण पत्र आवेदन को निरस्त करने से पहले आवेदक को स्पष्ट कारण बताकर सुधार का अवसर दिया जाए, ताकि पात्र नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

