सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ढहाए जाने के बाद नीचे कुआं मिला है। यह 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा है। कुआं स्लैब (पत्थर) से ढंका था। प्रशासन ने कटर से पत्थर कटवाया तो कुआं दिखाई दिया। पुलिस ने इसे लोहे की चादर से ढंक दिया है, ताकि मलबा अंदर न जाए।
कुआं कितना पुराना है? इसका पता लगाने के लिए प्रशासन ने ASI को बुलाया है। मौके पर भारी फोर्स तैनात है। बैरिकेडिंग करके किसी को वहां जाने नहीं दिया जा रहा। मस्जिद की शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया- यहां पहले मंदिर रहा होगा। उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई। जांच होनी चाहिए।
मस्जिद को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। सांसद चंद्रशेखर ने कहा- हम यह लड़ाई सदन, कोर्ट और सड़क पर लड़ेंगे। मस्जिद गिराने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? वहीं, मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने X पर लिखा- अखिलेशजी, सहारनपुर जाकर अवैध इमारत के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे? यूपी पूछ रहा है, बताइए न?
शनिवार को 16 घंटे बुलडोजर चलाकर मस्जिद ढहाई गई थी। रविवार सुबह तक मलबा हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद गिराई गई। मस्जिद पक्ष का आरोप है कि उसे हाईकोर्ट में अपील का मौका नहीं दिया गया। वकील बाबर वसीम ने कहा- कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
मुस्लिम धर्मगुरुओं और मस्जिद पक्ष का दावा है कि मस्जिद करीब 100 साल पुरानी थी। हालांकि, कल इसे 70 साल पुरानी बताया गया था। प्रशासन के मुताबिक, वक्फ के दस्तावेजों में मस्जिद 70 साल पुरानी दर्ज है।
आज की 3 तस्वीरें देखिए-

स्लैब टूटने के बाद उसके नीचे कुआं मिला। हालांकि, कुआं कितना पुराना है, इसका पता नहीं चल पाया है।

कुएं वाली जगह को लोहे की चादर से ढक दिया गया है, ताकि उसके अंदर मलबा न जा सके।

मलबा हटने के बाद मस्जिद वाली जगह पूरी तरह समतल हो गई है। अब वहां सिर्फ मिट्टी दिखाई दे रही है।
सहारनपुर सांसद बोले- मस्जिद नहीं टूटी, मेरा दिल टूटा है
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा- जो कुछ हुआ है, वो देश के संविधान के लिए, प्रदेश की न्यायिक प्रणाली के लिए बहुत ही दुखद है। पहली बात तो जिस आदेश के तहत कार्रवाई की गई, वह ध्वस्तीकरण का आदेश था ही नहीं। उसमें केवल बेदखली का आदेश था और उसमें 22 दिन का समय भी बचा हुआ था… आपने पूरा स्थान एक झटके के अंदर साफ कर दिया। मस्जिद की केवल ईमारत नहीं टूटी है। ये हमारा दिल टूटा है।ये देश की न्यायिक प्रणाली पर प्रहार किया गया है। हम न्याय मांगने जाएं तो जाएं कहां?
किसी भी चीज के ध्वस्तीकरण से पहले 15 दिन की कम से कम मोहलत की बात हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने कई-कई बार कहा है। ये संविधान के खिलाफ कृत्य है, देश के संविधान के साथ अपराध किया गया है।
मलबा हटाने के दौरान हैवी स्लैब मिला, पुलिस ने काटा तो कुआं दिखा
मलबा हटाने के दौरान हैवी स्लैब मिला। पोकलैंड से स्लैब नहीं टूटा तो कटर से काटा गया। इसके नीचे कुआं मिला। पुलिस ने कुएं को लोहे की चादर से ढक दिया है, ताकि उसमें मलबा न जाए।

