वाराणसी की मशहूर रामलीला में आजमगढ़ से आया हाथी अचानक बेकाबू हो गया। इधर-इधर भागने लगा। आसपास रखी चीजों को सूंड से उठाकर फेंकने लगा। बिजली के खंभे तोड़ दिए। दीवारें और दुकानें भी तोड़ दीं। यह देखकर आसपास मौजूद लोग जान बचाकर भागे।
महावत ने काबू में करने की कोशिश की तो हाथी ने उसे सूंड से उठाकर पटक दिया। दांतों और पैरों से भी कुचलने की कोशिश की। महावत को 50 टांके लगे हैं।
घटना पंचवटी मैदान में रविवार सुबह 10.30 बजे की है। महावत छापलू तीन हाथियों को खाना देने जा रहा था, तभी उनमें से एक हाथी भड़क गया। वह मैदान से निकलकर सड़क पर भागने लगा।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने 2 किमी. के इलाके को सील कर दिया है। आने-जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की है। ACP अनाउंस कर लोगों को इलाके से दूर रहने के लिए कह रहे हैं। वन विभाग और NDRF समेत 200 लोग हाथी को काबू करने में जुटे हुए हैं। रामनगर इलाके की बिजली काट दी गई है।
पंचवटी मैदान में आज भगवान राम और रावण का युद्ध है। मैदान की जिला मुख्यालय से दूरी 17 किमी, जबकि काशी विश्वनाथ मंदिर से 10 किमी है। यहां रामलीला के लिए आए हाथियों को रखा जाता है।
200 साल पुरानी इस रामलीला में हिस्सा लेने वाले एक्टर्स और अन्य लोग भी यहीं रहते हैं। काशी नरेश डॉ. अनंत नारायण सिंह के बेटे इसी हाथी पर सवार होकर रामलीला देखते हैं।

हाथी काशी की सड़कों पर बेकाबू होकर भाग रहा है। पेड़ों को उखाड़ रहा है।

पुलिस ने आसपास के 2 किमी इलाके को सील कर दिया है। रास्ते ब्लॉक कर दिए हैं।
बाग में घूम रहा हाथी, बीच-बीच में सड़क पर आकर पोल और घरों में तोड़फोड़ कर रहा
हाथी फिलहाल बाग में शांति से घूम रहा है। हालांकि, बीच-बीच में वह सड़क पर भी आ जा रहा है। इस दौरान वह बिजली के पोल और घरों को निशाना बनाकर तोड़फोड़ कर रहा है।
प्रशासन ने महावतों को मीडिया से बात करने से रोका
पिछले 7 घंटे से हाथी को काबू करने की कोशिश कर रहा महावत प्रशासन के निर्देश पर फिलहाल मीडिया से बात नहीं कर रहा है। उसने बताया कि हाथी पीछे से दौड़कर खलासी को मारने लगा था। खलासी उसका भाई था।
ट्रैंकुलाइजर गन से बेहोश किए जाते हैं जंगली जानवर
ट्रैंकुलाइजर गन को आम भाषा में बेहोशी की बंदूक कहा जाता है। इसका इस्तेमाल जंगली या आक्रामक जानवरों को सुरक्षित तरीके से काबू करने के लिए किया जाता है। इसमें सामान्य गोली की जगह दवा से भरा एक विशेष डार्ट छोड़ा जाता है, जो जानवर के शरीर में पहुंचकर असर करता है।
इसमें केटामाइन और जायलैजीन जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। दवा की मात्रा और उसके असर का निर्धारण जानवर की प्रजाति, आकार और स्वास्थ्य के आधार पर पशु चिकित्सक करते हैं।
- दवा का असर होने पर जानवर की गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं और वह बेहोश हो सकता है। वन विभाग और प्रशिक्षित विशेषज्ञ इसका इस्तेमाल जानवरों के रेस्क्यू, उपचार और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए करते हैं।
- दवाओं का असर होने के दौरान जानवर की सांस और अन्य जरूरी शारीरिक गतिविधियों पर निगरानी रखना भी जरूरी होता है।
आजमगढ़ से रामलीला में शामिल होने आया था हाथी, 13 साल से सेवा कर रहा महावत घायल
हाथी आजमगढ़ से रामनगर की रामलीला में शामिल होने आया था। आजमगढ़ निवासी शिब्ली सिंह इस हाथी के मालिक हैं। उन्होंने ही रामलीला में शामिल होने के लिए हाथी को भेजा था। हाथी ने जिस महावत छपालु को घायल किया, वह पिछले 13 साल से उसकी देखभाल कर रहा था।

