फ्रांस में पिछले हफ्ते हुई हिंसा के बाद आज फिर देशभर में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन होंगे। हिंसा और लूटपाट रोकने के लिए देशभर में करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनके साथ पुलिस की विशेष टीमें, करीब 20 बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाले 15 वाहन भी तैनात रहेंगे।
पिछले शनिवार को 5 लाख से ज्यादा लोग प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान दुकानों में तोड़फोड़ हुई, लूटपाट की गई और गाड़ियों में आग लगाई गई। अब तक 2,700 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
हालात को देखते हुए कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है और लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। पेरिस का लूव्र म्यूजियम बंद रहेगा, जबकि पेरिस सेंट-जर्मेन और लियोन के बीच फुटबॉल मैच भी टाल दिया गया है।
स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब महंगाई, बढ़ते खर्च और सरकारी सुविधाओं में कटौती के खिलाफ भी फैल गया है।
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महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ पोस्टर लेकर खड़े प्रदर्शनकारी।

पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक में प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले को पैर से हटाने की कोशिश करता नकाबपोश प्रदर्शनकारी।

लिमोज शहर में उपद्रवियों ने 1883 में बने ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी।

पेरिस में प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प के दौरान सड़क पर जलती चीजों के पास से गुजरते फ्रांसीसी दंगा पुलिसकर्मी। तस्वीर 17 अक्टूबर की है।

पेरिस में प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प के बीच दौड़ते पुलिसकर्मी।
मैक्रों ने छात्र संगठनों से मुलाकात की
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार को छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। एक महीने से ज्यादा समय पहले स्कूलों की हालत को लेकर प्रदर्शन शुरू होने के बाद यह उनकी छात्र संगठनों के साथ पहली सीधी बैठक थी।
मैक्रों ने कहा था कि वीकेंड पर सिर्फ मजदूर संगठनों के प्रदर्शनों को मंजूरी दी जाएगी। इस फैसले से छात्र संगठन नाराज हैं। फ्रांस के प्रमुख छात्र संगठन UNEF ने आज रैली निकालने का ऐलान किया है।
संगठन ने कहा कि मैक्रों लोगों के प्रदर्शन करने के अधिकार को छीन रहे हैं। उसने साफ किया कि रोक के बावजूद रैली निकाली जाएगी।
कई शहरों में कर्फ्यू, लोगों के जुटने पर रोक
हिंसा रोकने के लिए पेरिस में रात का कर्फ्यू सोमवार तक बढ़ा दिया गया है। मार्सेई और लियोन में शनिवार को लोगों के इकट्ठा होने पर रोक रहेगी। इन शहरों में सार्वजनिक परिवहन पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।
बोर्डो, नीस और उत्तरी फ्रांस के कई कस्बों में भी रात के समय कर्फ्यू लगाया गया है। कुछ जगहों पर बच्चों और किशोरों के रात में बाहर निकलने पर रोक है। पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हाल्स जैसे इलाकों में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक पाबंदियां रहेंगी।
वामपंथी पार्टी फ्रांस अनबाउड ने इन पाबंदियों की आलोचना की है। पार्टी के नेता ज्यां-ल्यूक मेलेंशों ने कहा कि सरकार और पुलिस के तरीके से हालात और बिगड़े हैं।
पिछले हफ्ते 3 हजार से ज्यादा दुकानों को नुकसान
सरकारी अनुमान के मुताबिक, पिछले वीकेंड फ्रांस में कम से कम 3,000 दुकानों को नुकसान पहुंचा या उनमें लूटपाट हुई। कारोबारियों के संगठन का कहना है कि इससे करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ है।
पेरिस में सुपरमार्केट, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों, बैंकों और महंगे ब्रांड के शोरूम को निशाना बनाया गया। बोर्डो में भी कई दुकानों में तोड़फोड़ हुई। उपद्रवियों ने गाड़ियों में आग लगाई, सड़कों पर बैरिकेड बनाए और बस स्टॉप जैसी सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया।
मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में 19वीं सदी की ऐतिहासिक टाउन हॉल इमारत को भी नुकसान पहुंचा। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने हिंसा से प्रभावित कारोबारियों को टैक्स में राहत और आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।

