- आश्रित परिवार के सदस्य भी होंगे लाभार्थी, उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किए आदेश
लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ देने का निर्णय लिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कुलसचिवों तथा उच्च शिक्षा निदेशक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विशेष सचिव निधि श्रीवास्तव द्वारा जारी आदेश के अनुसार इससे पूर्व राज्य विश्वविद्यालयों तथा सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों को यह सुविधा प्रदान की जा चुकी है। अब उच्च शिक्षा विभाग के अधीन स्थापित निजी विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि योजना के संचालन के लिए प्रीमियम एवं वास्तविक व्ययभार का निर्धारण अलग से किया जाएगा। कैशलेस उपचार की सुविधा स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (SACHIS) के माध्यम से लागू होगी। उपचार उन्हीं सरकारी एवं संबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा, जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के मानकों के अनुरूप सूचीबद्ध हैं।
योजना के तहत निजी विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्य भी लाभार्थी होंगे। प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय को पात्र शिक्षकों एवं उनके आश्रितों का विवरण प्रतिवर्ष 30 जून तक नामित नोडल अधिकारी के माध्यम से SACHIS को उपलब्ध कराना होगा, ताकि पात्र लाभार्थियों को योजना में शामिल या आवश्यकतानुसार विलोपित किया जा सके।
हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो शिक्षक या उनके आश्रित पहले से केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना, जैसे प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना अथवा मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं निजी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

