लखनऊ : लखनऊ के एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने कहा है कि जेन-जी औ जेन-अल्फा बहुत स्मार्ट है। बहुत इंटेलिजेंट है। इन्हें सही दिशा दिखानी है, ये अपने आप मंजिल तक पहुंच जाएंगे। मैंने भी इसी शहर से क्लासरूम से उठकर यहां तक पहुंचा। ये बच्चे भी यहां तक पहुंच सकते हैं।
एस्ट्रोनॉट शुभांशु लखनऊ में चल रहे गोमती पुस्तक महोत्सव में मंगलवार को पत्नी, बेटे और माता-पिता के साथ पहुंचे हैं। यहां उनकी लिखी किताब द सेकंड ऑर्बिट का विमोचन किया गया। पिछले साल वह नासा-इसरो के संयुक्त मिशन पर अंतरिक्ष गए थे। वहां 1 महीने से ज्यादा रहे थे। वहां से वापस आने के बाद लखनऊ में उनका ग्रैंड वेलकम किया गया था।

गोमती पुस्तक मेले में शुभांशु ने अफनी लिखी किताब द सेकंड ऑर्बिट का विमोचन किया।

गोमती पुस्तक महोत्सव का आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय के अंदर है। यहां पर एंट्री फ्री है।
बच्चों से बोले- स्पेस में मजा बहुत आता है
शुभांशु शुक्ला ने बच्चों से कहा- स्पेस में मजा बहुत आता है। मैं जब वहां पर था तो खूब जिमनास्ट किया। जो चीजें वहां कर सकते हैं, वो यहां (पृथ्वी) पर नहीं कर सकते। जब पहली बार स्पेस में पहुंचा धरती को देखा तो मेरे दिमाग में आया कि वह घर है। कोई शहर या प्रदेश की बात नहीं। मिशन के दौरान रॉकेट में 8 मिनट बिताए जाने का पूरा अनुभव बच्चो से शेयर किया। बताया कि उस दौरान सांस लेने में दिक्कत होती है।
भारत में बहुत कुछ नया और महत्वाकांक्षी काम हो रहा
एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपनी जीवन यात्रा और बच्चों के लिए मोटिवेशनल विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा भारत में बहुत कुछ नया और महत्वाकांक्षी काम हो रहा है। बच्चों को इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।
वह पुस्तक मेला के धरती से अंतरिक्ष तक सपनों की उड़ान में शामिल हुए। कार्यक्रम में उनकी किताब द सेकंड ऑर्बिट का विमोचन किया गया। इसमें उनके पिता शंभु दयाल शुक्ला, माता आशा शुक्ला, पत्नी डॉक्टर कामना शुक्ला मौजूद रहीं। कार्यक्रम में शुभांशु के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री चली। इसके साथ ही उनके मिशन का भी वीडियो चलाकर बच्चों को सीख दी गई।
किताब के जरिये अपनी जर्नी साझा की
पुस्तक मेले और अपनी पुस्तक पर बात करते हुए शुभांशु ने बताया कि उन्होंने किताब के माध्यम से अपनी पूरी जीवन यात्रा साझा की है। उन्होंने कहा मैं बच्चों को यह बताना चाहता हूं कि कैसे एक साधारण क्लासरूम से निकलकर मैं इस मुकाम तक पहुंचा। अगर मैं यहां तक पहुंच सकता हूं, तो आज के बच्चे भी पहुंच सकते हैं।
उनकी किताब पर भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने एक वीडियो संदेश में कहा कि यह किताब इसके कवर से ना जज किया जाए। एक वीडियो मैसेज में बताया कि इस किताब में शुभांशु ने अपनी जर्नी व एक्सपीरियंस को साझा किया है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के जरिए भविष्य में और बेहतर काम हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह किताब इसके कवर से ना किया जाए।

