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आलू–प्याज के दाम के साथ फुटकर महंगाई भी बढ़ी:लगातार तीसरे महीने RBI के अनुमान से ज्यादा रही, अगस्त में 4.82% पर पहुंची

दैनिक उजाला, बिज़नेस डेस्क : आलू-प्याज समेत कई सब्जियों के दाम बढ़ने से अगस्त में फुटकर महंगाई दर भी बढ़ी है। यह लगातार आठवां महीना है, जब फुटकर (खुदरा) महंगाई दर बढ़ी है।

अगस्त में फुटकर महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई। जुलाई में यह 4.45% थी।

सरकार ने 14 सितंबर को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए है। इसके अनुसार खाने-पीने की चीजों की फुटकर महंगाई दर 5.95% रही।

रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया है। यह लगातार तीसरा महीना है जब रिटेल महंगाई आरबीआई के तय कम्फर्ट जोन 4% से ऊपर दर्ज की गई है।

महंगाई बढ़ने की वजह

  1. खाने-पीने की चीजें महंगी: खाद्य महंगाई जुलाई के 5.52% से बढ़कर अगस्त में 5.95% हो गई।
  2. मानसून का असर: कमजोर/अनियमित मानसून से कृषि आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
  3. प्याज, अदरक और लहसून महंगे हुए: अगस्त में प्याज की महंगाई 48.27%, लहसुन की 43.60% और अदरक की 73.82% रही।
  4. कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों का दबाव: अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल करीब 100 डॉलर से ऊपर जाने से भारत के आयात बिल और ट्रांसपोर्ट लागत पर दबाव बढ़ा।

आम आदमी पर प्रभाव

  1. राशन महंगा: सब्जी, मसाले और दूसरी खाद्य चीजों का मासिक बजट बढ़ेगा।
  2. आने-जाने का खर्च बढ़ सकता है: महंगा कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ाता है, जिसका असर सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
  3. बचत पर दबाव: अगर आय उसी गति से नहीं बढ़ती, तो महंगाई के कारण महीने के अंत में बचने वाली रकम कम होगी। इससे बचत घटेगी।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

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