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ऑपरेशन सिंदूर-314km दूर पाकिस्तानी विमान को S-400 ने मार गिराया:रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट- दूरी दुश्मन को बचा नहीं सकती

नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना (IAF) के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने 314km की दूरी से पाकिस्तान के एक स्पेशल-मिशन विमान (F-16) को निशाना बनाकर खत्म किया था। रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की रिपोर्ट में जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारत की ओर से सबसे लंबी दूरी के जमीन से हवा में किए गए हमलों में से एक है। इसके मुताबिक, इस कार्रवाई ने एयरफोर्स की लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता को दिखाया। इससे संदेश भी गया कि ज्यादा दूरी पर होना दुश्मन के विमानों को भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम से सुरक्षित नहीं रख सकता।

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों के खिलाफ 7 से 10 मई तक ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। भारतीय सेना ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।

एयरफोर्स ने 26 फरवरी को पहली-बार S-400 की फायरिंग का जारी किया था।

एयरफोर्स ने 26 फरवरी को पहली-बार S-400 की फायरिंग का जारी किया था।

S-400 ने खतरे को ट्रैक किया

रिपोर्ट के मुताबिक, S-400 ने पाकिस्तानी विमान के खतरे को ट्रैक किया। इसके बाद लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल को टारगेट की ओर गाइड किया गया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह S-400 की क्षमता दिखाता है, जो काफी दूर मौजूद लक्ष्यों को भी निशाना बना सकता है।

पाकिस्तान पर एयरस्पेस खुला रखने का आरोप

रिपोर्ट में भारत ने आरोप लगाया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने अपना नागरिक एयरस्पेस खुला रखा और सिविल फ्लाइट्स भी जारी रहीं। भारत का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को खतरे से बचाना था।

IACCS ने संभाला एयर डिफेंस

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने देश की हवाई सुरक्षा संभाली। एयर डिफेंस को इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) के जरिए कंट्रोल और समन्वित किया गया।

इस सिस्टम ने सैन्य और नागरिक रडार से मिली जानकारी को जोड़कर आसमान की एक साझा तस्वीर तैयार की। इससे दुश्मन के विमानों और दूसरे लक्ष्यों की पहचान में मदद मिली।

एयरफोर्स के नेटवर्क सिस्टम और प्रशिक्षित ऑपरेटरों ने सैन्य और नागरिक विमानों में अंतर करने में मदद की। इससे किसी सिविल विमान को गलती से निशाना बनाए जाने का खतरा कम हुआ।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने सैन्य कार्रवाई के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को सुरक्षित रखने की कोशिश की।

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