नई दिल्ली/काठमांडू : भारत ने नेपाल को 654 मेगावाट बिजली देने की मंजूरी दी है। भारत के बिजली मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2026 तक रोज 18 घंटे, यानी रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी दी है।
इतनी बिजली लगातार मिलने पर लगभग 28 लाख घरों की सालभर की बिजली जरूरत पूरी हो सकती है।
दरअसल, हाल ही में आई बाढ़ से नेपाल के हाइड्रोपावर ढांचे को काफी नुकसान हुआ है। इससे वहां करीब 550 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के नुकसान का अनुमान है। नेपाल को अतिरिक्त बिजली की जरूरत पैदा हुई है।
नेपाल ने साल 2023-24 में भारत को ज्यादा बिजली बेची थी
भारत इससे पहले भी नेपाल को बिजली देता रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में भारत ने नेपाल को करीब 18ा0 मिलियन यूनिट बिजली दी थी। यह औसतन करीब 206 MW लगातार बिजली के बराबर बैठती है।
हालांकि नेपाल सर्दियों के मौसम में भारत से बिजली आयात करता है, लेकिन मानसून के महीनों में वह भारत को भारी मात्रा में बिजली बेचता भी है। वर्ष 2023-24 में नेपाल ने भारत से जितनी बिजली खरीदी, उससे ज्यादा मूल्य की बिजली भारत को बेची थी।
लेकिन 26 अगस्त को आई बाढ़ की वजह से नेपाल कम बिजली बना रहा है, जिसके चलते उसकी भारत पर निर्भरता बढ़ी है।
बिजली सेक्टर को 997 मिलियन डॉलर का नुकसान
नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से ऊर्जा सेक्टर को करीब 997 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। इससे हर साल करीब 2,520 GWh बिजली उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है।
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से कुल नुकसान करीब 2.7 अरब डॉलर का हुआ है।
सबसे ज्यादा करीब 65% नुकसान इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंचा है। करीब 69 किमी सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिन्हें ठीक करने में करीब 364.28 मिलियन डॉलर लगने का अनुमान है।
भारत ने अब तक नेपाल को 8 राहत खेप भेजी
- भारत ने नेपाल में 140 टन से ज्यादा राहत और बचाव का सामान भेजा है। इसमें टेंट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग, फोल्डिंग बेड और कंबल शामिल हैं।
- इसके अलावा जरूरी दवाएं, पानी साफ करने की गोलियां, मेडिकल किट और हाइजीन किट भी भेजी गई हैं।
- बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी निकालने के लिए वॉटर पंप, बिजली के लिए पोर्टेबल जनरेटर, सोलर लैंप और खाने के पैकेट भी भेजे गए हैं।
- बाढ़ के कारण नेपाल में कई गांव-शहर का संपर्क टूट गया था। 100 से ज्यादा पुल क्षतिग्रस्त हुए थे। मदद के लिए नेपाल ने भारत-चीन समेत दुनिया से 42 बेली ब्रिज की मदद मांगी थी। भारत की ओर से करीब 8 बेली ब्रिज बनाने का सामान भेजा गया।
- साथ ही भारत ने डॉक्टर्स, फोरंसिक टीम, टेक्नीकल टीम और सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए टनल रेस्क्यू टीम भी भेजी।

