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जानें धमाकों से कब-कब दहली देश की राजधानी

नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास जोरदार धमाका हुआ है। इस घटना में मृतकों का आंकड़ा 11 पहुंच चुका है। वहीं, घायलों की संख्या 30 के करीब बताई जा रही है। यह धमाका पार्किंग में खड़ी कार में हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास खड़ी गाड़ियां भी पूरी तरह से जलकर खाक हो गईं। घटना के वीडियो हादसे की गंभीरता बयां करते हैं। दिल्ली में 2011 के बाद से यह पहला बड़ा धमाका है। हालांकि, अब तक यह सामने नहीं आया है कि धमाका कैसे हुआ। शुरुआत में कहा गया था कि सीएनजी कार में आग लगी है, लेकिन धमाके की विभत्सता देखने के बाद कई तरह की आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब दिल्ली धमाकों से दहली है। इससे पहले भी दिल्ली में कई जानलेवा धमाके हो चुके हैं। यहां हम ऐसी ही घटनाओं के बारे में बता रहे हैं।

भारत की राजधानी होने के कारण दिल्ली कई बार आतंकी हमलों और बम धमाकों का शिकार बनी है। इन घटनाओं ने न केवल शहर को दहला दिया, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। यहां हम 1997 के बाद से दिल्ली में हुए बड़े धमाकों के बारे में बता रहे हैं।

तारीखजगहमृतकघायलविवरण
9 जनवरी 1997आईटीओ (दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने)050एक बम विस्फोट से 50 लोग घायल।
1 अक्टूबर 1997सदर बाजार (जुलूस के पास)030दो बम विस्फोटों से 30 घायल।
10 अक्टूबर 1997शांतिवन, कौरिया पुल, किंग्सवे कैंप116तीन बम धमाकों से एक मृत और 16 घायल।
18 अक्टूबर 1997रानी बाग बाजार123जुड़वां बम विस्फोटों से एक मृत।
26 अक्टूबर 1997करोल बाग बाजार134जुड़वां बम विस्फोटों से एक मृत।
30 नवंबर 1997लाल किले क्षेत्र370जुड़वां विस्फोटों से भारी तबाही।
3 जून 1999चांदनी चौक027बम धमाके से 27 घायल।
16 अप्रैल 1999होलंबी कलां रेलवे स्टेशन2दो मृतक।
6 जनवरी 2000पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन020ट्रेन में विस्फोट से 20 घायल।
27 फरवरी 2000पहाड़गंज08बाजार में विस्फोट।
16 मार्च 2000सदर बाजार07भीड़भाड़ वाले इलाके में धमाका।
18 जून 2000लाल किला के पास212दो शक्तिशाली विस्फोट, जिसमें एक 8 वर्षीय बच्ची की मौत।
9 मई 2001आर्मी मुख्यालय, दालहौजी रोड01दो विस्फोटों से एक घायल।
20 मई 2001सीजीओ कॉम्प्लेक्स00कोई हताहत नहीं।
11 अगस्त 2001साउथ एक्सटेंशन02दो घायल।
13 दिसंबर 2001संसद भवन पर हमला12सशस्त्र हमलावरों ने संसद पर कब्जा करने की कोशिश की।
22 मई 2005लिबर्टी और सत्यं सिनेमा हॉल160दो सिनेमा हॉलों में सीरियल ब्लास्ट।
29 अक्टूबर 2005सरोजिनी नगर, पहाड़गंज, गोविंदपुरी (बस में)62210धनतेरस के दिन तीन बाजारों और बस में विस्फोट; लश्कर-ए-तैयबा ने जिम्मेदारी ली।
14 अप्रैल 2006जामा मस्जिद014दो विस्फोटों से 14 घायल।
13 सितंबर 2008करोल बाग (गफ्फार मार्केट), कनॉट प्लेस, ग्रेटर कैलाश-130100+पांच सीरियल ब्लास्ट 45 मिनट में; इंडियन मुजाहिदीन ने ईमेल के जरिए चेतावनी दी। चार बम डिफ्यूज भी किए गए।
7 सितंबर 2011दिल्ली हाईकोर्ट950कोर्ट गेट के बाहर विस्फोट।
10 नवंबर 2025लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास1130पार्किंग में खड़ी कार में धमाका

आतंकी हमले से जुड़े थे अधिकतम धमाके

दिल्ली में हुए अधिकतर धमाके आतंकी घटनाओं से जुडे़ थे। इनमें इंडियन मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकी संगठन शामिल थे। इन हमलों ने दिल्ली की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए, जैसे सीसीटीवी बढ़ाना और खुफिया तंत्र को सशक्त बनाना। इस वजह से पिछले एक दशक में कोई बढ़ा धमाका नहीं हुआ था। हालांकि, अब दोबारा ऐसी घटना हुआ है, लेकिन धमाके की वजह साफ नहीं है।

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