अलीगढ़ : अलीगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में है। जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के पदों पर जल्द बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। संगठन सृजन अभियान के बाद दोनों पदों के लिए नामों पर पार्टी स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि 15 सितंबर तक या इसके बाद नए जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के नामों का ऐलान हो सकता है।
दोनों पदों के लिए पार्टी के भीतर कई दावेदार सक्रिय हैं। अलग-अलग खेमों की ओर से अपने-अपने पसंदीदा नेताओं के नाम आगे बढ़ाने की कोशिश चल रही है। एक तरफ पुराने और संगठन में पहले से सक्रिय चेहरों को फिर जिम्मेदारी देने की पैरवी हो रही है, तो दूसरी तरफ नए चेहरों को मौका देकर संगठन में बदलाव की मांग उठ रही है।
पर्यवेक्षक के दौरे के बाद बढ़ी हलचल
पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश पर्यवेक्षक अलीगढ़ पहुंचे थे। उन्होंने स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों के साथ संगठन को लेकर मंथन किया। संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी की जमीनी स्थिति, सक्रिय कार्यकर्ताओं और विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक जरूरतों पर फीडबैक लिया गया।
पर्यवेक्षक के दौरे के बाद से ही जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के पद को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व संभावित नामों पर विचार-विमर्श कर रहा है।
पुराने चेहरों पर भरोसा या नए नेतृत्व को मौका
कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल संगठन की कमान को लेकर है। पार्टी पुराने और अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताती है या फिर नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर संगठन में नई ऊर्जा लाने की कोशिश करती है।
पार्टी का एक खेमा पुराने और अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देने के पक्ष में है। वहीं, दूसरा खेमा नए नेतृत्व को मौका देने की मांग कर रहा है। दोनों पदों के लिए कई नाम चर्चा में हैं, इसलिए अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के स्तर से होने की संभावना है।
विधानसभा चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने पर फोकस
कांग्रेस की रणनीति विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ और क्षेत्रीय स्तर तक मजबूत करने की है। ऐसे में जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष का चयन पार्टी के आगामी चुनावी अभियान के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर खेमेबंदी के बीच दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। अब निगाहें पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। 15 सितंबर तक या इसके बाद होने वाली घोषणा से साफ होगा कि कांग्रेस अलीगढ़ में पुराने चेहरों पर दांव लगाती है या संगठन की कमान नए नेतृत्व को सौंपती है।

