- कश्मीर और लद्दाख में अक्टूबर में ही बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है, इससे तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है
कश्मीर और लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई है। द्रास में इस मौसम की पहली अच्छी-खासी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-कारगिल-लेह नेशनल हाईवे के आस-पास का नज़ारा पूरी तरह बदल गया है और पूरे इलाके में ठंड काफी बढ़ गई है। सुबह-सुबह जोजिला दर्रा, साधना दर्रा, राजदान दर्रा, गुमरी की पहाड़ियों, द्रास और लद्दाख के मीनामार्ग जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा बर्फबारी हुई। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण श्रीनगर-कारगिल-लेह नेशनल हाईवे के ऊंचे हिस्से बर्फ की सफेद चादर से ढक गए हैं। इसके अलावा, गुलमर्ग और पीर पंजाल रेंज के ऊंचाई वाले इलाकों में भी हल्की बर्फबारी की खबर है।
द्रास-जोजिला में बर्फ की चादर
रिपोर्ट्स के अनुसार, द्रास और उसके आस-पास के ऊंचे इलाकों में हुई यह बर्फबारी इस मौसम की पहली मध्यम स्तर की बर्फबारी है, जिसने जोजिला से मीनामार्ग तक के रास्ते का नजारा बदल दिया है। बर्फबारी मुख्य रूप से ऊंचाई वाले इलाकों तक ही सीमित रही, मैदानी इलाकों में इसका असर कम दिखा। हालांकि, आसमान में बादल छाए रहने के कारण कश्मीर और लद्दाख के तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है।

सड़कें फिसलन भरी हो गईं, वाहन चालकों को चेतावनी
सोनमर्ग-जोजिला-मीनामार्ग मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने सलाह दी है कि लोग ट्रैफिक कंट्रोल रूम से मिलने वाले ताज़ा अपडेट पर नजर रखें, फिसलन वाले रास्तों पर गाड़ियों के टायरों में ‘एंटी-स्किड’ (फिसलन रोकने वाली) चेन का इस्तेमाल करें और गाड़ी सुरक्षित गति से चलाएं। श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी कॉरिडोर पर ट्रैफिक को मौसम और सड़क की स्थिति के आधार पर तय समय के अनुसार ही चलने दिया जा रहा है, और गाड़ियों में ‘एंटी-स्किड’ उपकरण साथ रखने की सख्त सलाह दी गई है।

आज कैसा रहेगा मौसम?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 24 घंटों तक जम्मू-कश्मीर में आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। 30 अक्टूबर तक ऊंचाई वाले इलाकों में रुक-रुक कर हल्की बारिश, गरज के साथ बौछारें या बर्फबारी होने की संभावना है। इसके बाद मौसम के कुछ दिनों तक शुष्क रहने की उम्मीद है, हालांकि कहीं-कहीं हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है।
बर्फबारी का यह दौर इस इलाके में धीरे-धीरे सर्दियों के आगमन का संकेत है। सीज़न की शुरुआत में, खासकर अक्टूबर के मध्य से अंत तक, राजदान दर्रा, पीर की गली, सिंथन टॉप, मार्गन टॉप, गुलमर्ग के पास अफरावत, बालटाल-सोनमर्ग, गुरेज़, तुलैल और अन्य ऊंचे इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी हो चुकी थी। उस समय हुई बर्फबारी के कारण कश्मीर और जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से कई डिग्री नीचे गिर गया था, और राजदान दर्रे जैसी बर्फ से ढकी जगहों पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।
जल्द पड़ेगी कड़ाके की सर्दी
हालांकि, अभी हो रही बर्फबारी से घाटी के निचले इलाकों में जनजीवन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन ऊंचे दर्रों पर जमी बर्फ की चादर और बढ़ती ठंड इस बात का संकेत है कि कड़ाके की सर्दी आने वाली है। ऊंचे इलाकों में रहने वाले लोगों, पर्यटकों और वहां से गुजरने वाले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि जैसे-जैसे मौसम आगे बढ़े, वे मौसम और ट्रैफिक से जुड़ी जानकारी पर नजर रखें।

