सीकर : सीकर के रैवासा धाम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संत राघवाचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने 9 दिवसीय सियपिय मिलन समारोह का शुभारंभ करते हुए राघवाचार्य को भी याद किया। संघ प्रमुख ने कहा कि शक्ति और भक्ति की भूमि पर आज मेरा आना हुआ है। भागवत ने कहा कि…

यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यहां मेरा जिस स्नेह से आपने स्वागत किया है, जो सद्भावना अच्छे शब्दों में प्रकट की है, यह सब देखकर मुझे एक बार फिर मुझे राघवाचार्य महाराज का स्मरण हुआ। भगवान से प्रार्थना है कि मेरा दिमाग ठीक रहे।
संघ प्रमुख ने कहा कि मेरा तो सरसंघ चालक बनने के बाद उनसे संबंध हुआ था। उनसे पहली भेंट में मेरे ध्यान में दो बात आई थी- उनके मन में सबके लिए स्नेह था और सबको आत्मीय भाव से देखते थे। संघ प्रमुख ने कहा बहुत से संत ऐसे हैं संघ कार्यक्रमों में नहीं आए, लेकिन वो स्वयंसेवक हैं।

आरएसएस प्रमुख ने रैवासा धाम में महंत राघवाचार्य की प्रतिमा के साथ गुरुकुल भवन का भी लोकार्पण किया।
9 दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होंगे देशभर के बड़े संत
सीकर के श्री जानकीनाथ बड़ा मंदिर (रैवासा धाम) में आज से 9 दिवसीय ‘श्री सियपिय मिलन समारोह’ की शुरुआत हुई है। महंत राघवाचार्य की प्रथम पुण्यतिथि (30 अगस्त) पर कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है।
समारोह में योगगुरु बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, श्रीगुरु शरणानंद जी महाराज, जगद्गुरु रामानंदाचार्य सहित कई संत भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि जब वो पहली बार विधायक बने थे तब रैवासा धाम आए थे।
तस्वीरें…

आरएसस प्रमुख मोहन भागवत ने संत राघवाचार्य के साथ अपने अनुभव भी मंच से शेयर किए।

कथावाचक पं. इंद्रेश उपाध्याय रैवासा धाम में 12 से 18 अगस्त तक कथावाचन करेंगे।

समारोह के लिए देशभर से भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वे इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साहित हैं। ये धाम उनकी आस्था का प्रतीक है।
भारत विश्व में स्थान बना रहा है- आरएसस प्रमुख
- RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- जब इतिहास ने भी आंखें नहीं खोली थी। तब से यह काम भारतवर्ष और भारत का हिंदू समाज कर रहा है।
- स्वतंत्रता के बाद का हमारा इतिहास देखें तो इतिहास के आधार पर कोई यह तर्क नहीं कर सकता कि भारतवर्ष उठेगा, लेकिन भारत वर्ष उठ रहा है।
- विश्व में अपना स्थान बना रहा है। भारत के स्वतंत्र होने के बाद लोगों ने भविष्यवाणी की थी कि यहां प्रजातंत्र चल ही नहीं सकता।
- आज भारत आश्चर्यकारक रीति से प्रजातांत्रिक देश के नाते प्रजातंत्र के मामले में सारी दुनिया से आगे है।

आरएसस प्रमुख ने रैवासा धाम में महंत राजेंद्रदास जी के साथ चर्चा भी की।
राघवाचार्य महाराज थे, तब रैवासा आया था – मोहन भागवत
- आरएसएस प्रमुख ने कहा कि- उनके (राघवाचार्य महाराज) रहते हुए मैं एक बार रैवासा धाम आ चुका हूं।
- मैंने उन्हें कहा था जब-जब आऊंगा, तब आपसे मिलूंगा। जब मैं यहां आया तो तीन से चार घंटे रुका।
- उन्होंने गुरुकुल के छात्रों से भी मिलाया। उस वक्त भी वही स्नेह और समाज के लिए तड़पन थी। बहुत सारे ऐसे संत, जो संघ के कार्यक्रमों में नहीं आए, लेकिन वह स्वयंसेवक ही हैं।
- फिर से यहां पर आना उनके जाने के बाद होगा, इसका मुझे बिल्कुल भी अनुमान नहीं था।
- ऐसा अनुमान किसी को होता भी नहीं है। भगवान से प्रार्थना है कि मेरा दिमाग ठीक रहे।
हर दिन 5 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे
- सियपिय मिलन समारोह में अखंड हरिनाम संकीर्तन, रासलीला, चित्र-विचित्र जी की भजन संध्या सहित कई कार्यक्रम होंगे।
- रैवासा धाम में आयोजित हो रहे इस समारोह में हर शाम 7 से 10 बजे तक भजन संध्या होगी
- प्रतिदिन 5 हजार और समापन पर 20 हजार लोगों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई है।
- केंद्रीय व राज्य मंत्रियों, मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम के आने की संभावना हैं।

