आंवला : बरेली में नसबंदी के बाद एक महिला प्रेग्नेंट हो गई। इससे नाराज होकर महिला ने एसडीएम से शिकायत की और कार्रवाई की मांग की है। महिला का कहना है कि वह पहले से 4 बच्चों की मां है। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए वह ज्यादा खर्च नहीं उठा सकती।
महिला का कहना है कि उसने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कराई थी। वहीं, 5 साल बाद वह प्रेग्नेंट हो गई। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट लेकर वह नसबंदी कराने वाले अस्पताल में पहुंची तो उन लोगों ने रिपोर्ट मानने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि नसबंदी कराने के बाद अगर कोई महिला प्रेग्नेंट होती है तो उसे सरकार की तरफ से 30 हजार रुपए मुआवजा दिया जाता है। महिला का कहना है कि उसे मुआवजा भी नहीं दिया गया। पूरा मामला आंवला थाना क्षेत्र का है।
आंवला थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला की 18 साल पहले शादी हुई थी। उसके तीन बेटे और एक बेटी है। सबसे बड़ा बेटा 16 साल का, दूसरा 14, तीसरा 12 और 9 साल की एक बेटी है। महिला का पति मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पालन पोषण करता है।
महिला का कहना है- 4 बच्चे होने के बाद 19 जनवरी 2021 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर में लैप्रोस्कोपिक विधि से अपनी नसबंदी कराई थी। सबकुछ ठीक चल रहा था। कुछ दिन पहले महिला को गर्भावस्था के लक्षण महसूस हुए।
महिला ने बताया- 5 अप्रैल को मैंने आंवला के एक निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया। यहां डॉक्टर ने केवल गर्भ ठहरने की बात बताई।लेकिन मैंने नसबंदी करा रखी थी, तो मुझे विश्वास नहीं हुआ।
इसके बाद 7 अप्रैल को मैं बरेली जिला अस्पताल गई। यहां मैंने अल्ट्रासाउंड में कराया तो डॉक्टर ने 6 महीने 6 दिन की प्रेग्नेंट बताया। डॉक्टर की बात सुनकर मैं हैरान रह गई। वहां से घर आई। अगले दिन मैं जहां नसबंदी कराई थी वहां पहुंची।
रिपोर्ट मानने से इनकार कर दिया
महिला ने कहा- मैं अपने साथ निजी अस्पताल और सरकारी अस्पताल दोनों की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट लेकर पहुंची। वहां मैंने डॉक्टरों से प्रेग्नेंसी की बात बताई। साथ ही अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट भी दिखाई। लेकिन डॉक्टर ने रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया।
मेरे किसी बात को नहीं सुना। जिला अस्पताल की रिपोर्ट दिखाने पर भी उन्हें किसी तरह की सहायता या आश्वासन नहीं दिया।
मेरे पहले से 4 बच्चे हैं
महिला ने कहा- परेशान होकर मैं मंगलवार को एसडीएम ऑफिस पहुंची। एसडीएम को शिकायत पत्र देते हुए महिला ने कहा- मेरे पहले से ही 4 बच्चे हैं। मेरी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि मैं इतना खर्च झेल सकूं। मुआवजे के लिए भी मैं चक्कर काट रही हूं।
नसबंदी कराने के बाद भी गर्भवती हो गई। लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए। उपजिलाधिकारी विदुषी सिंह ने शिकायत के आधार पर मामले में पीड़िता को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

