मेरठ : मेरठ की सेंट्रल मार्केट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने 44 सील संपत्तियों से अवैध निर्माण और 815 घरों के आगे का अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए।
मंगलवार दोपहर 3 बजे सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसका पता चलते ही 89 दिनों से धरने पर बैठी महिलाएं फूट-फूटकर रोने लगीं। कहने लगीं- 3 महीने के आंदोलन, पूजा-पाठ और जनप्रतिनिधियों से गुहार के बाद भी कोई राहत नहीं मिली।
सरकार गूंगी-बहरी हो गई है। सरकार ने हमें सड़क पर ला दिया। हमारा सब कुछ खत्म हो गया। अब इस उम्र में दोबारा घर कहां बनाएंगे? अब कहां जाएंगे? ऐसी जिंदगी से तो अच्छा है, हमें मार दो।
कोर्ट ने मेरठ के अन्य आवासीय इलाकों में भी नियमों के खिलाफ चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच कराने का निर्देश दिए हैं। प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को सितंबर तक रिपोर्ट पेश करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसले आने के बाद महिलाएं फूट-फूटकर रोने लगीं।
सरकार गूंगी-बहरी, तीन महीने से हमारी किसी ने नहीं सुनी
धरने पर बैठीं शीतल पुजानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा- सरकार गूंगी-बहरी हो गई है। हम तीन महीने से सड़कों पर बैठे हैं, लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी। हमारी हालत ऐसी हो गई है कि हमें सड़क पर ला दिया गया। हमारा सब कुछ खत्म हो गया। आखिर तीन महीने से धरने पर बैठे लोगों की सुनवाई क्यों नहीं हुई?
महिलाओं ने कहा कि सरकार हमें सड़क पर ले आई है। हमारा सब कुछ खत्म कर दिया।
‘सब कुछ छीन लिया, अब वोट क्यों दें’
धरने पर बैठीं राधा गुप्ता ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा- सरकार हमें सड़कों पर ले आई है। लोग कहते हैं कि सरकार काम कर रही है, लेकिन आज हमारी हालत सबके सामने है। हमारे घर तोड़ दिए गए, व्यापार खत्म हो गया। अब हमसे वोट की उम्मीद की जा रही है। जब सब कुछ छीन लिया, तो हम वोट क्यों दें?
धरने पर मौजूद अन्य महिलाओं ने बताया कि कहा जाता है, नारी का सम्मान होता है। लेकिन, हमारी पीड़ा किसी ने नहीं देखी। हम तीन महीने से सड़कों पर बैठे हैं। हमारा रोजगार छिन गया, घर भी चले गए। जीवनभर की जमापूंजी इन मकानों और दुकानों में लगी थी। अब इस उम्र में दोबारा घर कहां बनाएंगे? सरकार हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है।

महिलाओं ने मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ कर भगवान से अपना व्यापार बचाने की प्रार्थना की थी।
89 दिनों तक पूजा-पाठ कर मांग रही थीं न्याय
महिलाओं ने मंगलवार को धरनास्थल पर सुंदरकांड का पाठ किया। भगवान से अपने प्रतिष्ठान और व्यापार को बचाने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि पिछले 89 दिनों से चल रहे धरने के दौरान पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए न्याय की गुहार लगाई गई।
कई जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर अपनी बात रखी, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद बची हुई उम्मीद भी टूट गई।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
44 सील संपत्तियों और 815 मकानों से हटेगा अवैध निर्माण
सुप्रीम कोर्ट ने सील 44 संपत्तियों पर किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। ये घर थे, जहां मालिक बिजनेस करने लगे थे। साथ ही 815 मकानों में किए गए सेटबैक अतिक्रमण को भी हटाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह आदेश लोकेश खुराना की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई के दौरान व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अपनी बात रखी।
अब पूरे मेरठ में जांच होगी
सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को मेरठ के अन्य आवासीय क्षेत्रों की भी जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जहां आवासीय भवनों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, उनकी पहचान कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। यह रिपोर्ट सितंबर में होने वाली अगली सुनवाई में पेश की जाएगी।

मेरठ में महिलाएं 89 दिनों से धरना दे रही थीं।
सेंट्रल मार्केट का पूरा गणित समझिए
सेंट्रल मार्केट में कुल 860 संपत्तियां हैं। इनमें ज्यादातर भूखंड मूल रूप से आवासीय थे, लेकिन नियमों के विपरीत इनका व्यावसायिक उपयोग किया गया। इसी को लेकर शिकायत होने पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहले चरण में 44 संपत्तियां सील की गई थी। एक मकान को गिरा दिया गया था। अब 815 संपत्तियों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। कोर्ट ने अवैध निर्माण हटाकर भवनों को नियमों के अनुसार मूल स्वरूप में लाने के निर्देश दिए हैं।
सेक्टर-2 के व्यापारी अर्पित मोगा ने बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि भवन 25 मीटर, 38 मीटर, 44 मीटर या इससे बड़ा हो, सभी पर एक जैसे नियम लागू होंगे। जिन भवनों का पूरा हिस्सा व्यावसायिक उपयोग में है, वहां पूरी तरह ध्वस्तीकरण होगा। जिन भवनों में आंशिक व्यावसायिक उपयोग है, उनका मौके पर निरीक्षण कर कार्रवाई तय की जाएगी।
EWS, LIG और MIG को भी राहत नहीं
प्रभावित लोगों का कहना है कि EWS, LIG और MIG श्रेणी के मकानों को भी कोई राहत नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि मकान छोटा हो या बड़ा, सेटबैक का मामला हो या कोई अन्य तकनीकी खामी, किसी भी आधार पर छूट नहीं दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन भवनों में बिना अनुमति G+1, G+2 या G+3 मंजिलें बनाई गई हैं, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। उनका कहना है कि परिवार बढ़ने पर जरूरत के हिसाब से मकानों का विस्तार किया गया था। अब कार्रवाई होने पर कई परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो सकता है।

