रामपुर : ‘वह बड़े जनसमूह की नायक हैं। मैं उनकी इज्जत करता हूं। मेरी नजर में उनकी अहमियत है। वह बड़ी सियासतदान हैं। मैं तो एक छोटा कार्यकर्ता हूं। हमारी कुछ मानवीय जरूरतें भी हो सकती हैं, समाजी भी हो सकती हैं। उसके लिए हम मिल ही सकते हैं। कभी भी जरूरत होगी तो हम मिल सकते हैं।’
ये बातें आजम खान ने मायावती के उस बयान पर कहीं, जिसमें बसपा सुप्रीमो ने कहा था कि अफवाह फैलाई गई कि दूसरी पार्टी के फलाना वरिष्ठ नेता हमारी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। दिल्ली और लखनऊ में मुलाकात भी हो गई हैं। मैं ऐसे किसी से छिपकर नहीं मिलती हूं। जब भी मिलती हूं, खुले में मिलती हूं।
दरअसल, पिछले महीने जब आजम खान ने जेल से बाहर आए थे, तब से ही अफवाहें उड़ने लगी थीं कि कद्दावर नेता बसपा में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए मायावती और आजम के बीच दिल्ली और लखनऊ में मुलाकातें भी हो चुकी हैं। हालांकि, दोनों ही नेता अपने-अपने अंदाज में इन दावों को खारिज करते रहे थे।
‘उन तक यह खबर कैसी पहुंची, मुझे पता नहीं’
ऐसे में जब मायावती ने लखनऊ में बड़ी रैली कर इस मामले का जिक्र किया तो आजम ने भी इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा- मैं इस पर थोड़ा दुख जाहिर करता हूं। उन्हें कैसे खबर पहुंची, यह मुझे पता नहीं। मैं ही नहीं, पूरा देश उनका बहुत सम्मान करता है और वे इसकी हकदार भी हैं।
उन्होंने कहा- वह मुख्यमंत्री रहीं न रहीं, इससे कोई लेना-देना नहीं। वह बड़े जनसमूह की नायक हैं। वह एक बड़ी नेता हैं। मैं उनकी इज्जत करता हूं। अगर किसी माध्यम से उन तक ऐसी कोई खबर पहुंची। जिससे उन्हें दुख पहुंचा हो, तो मुझे अफसोस है।
आजम ने कहा- मेरी नजर में उनकी अहमियत है। मेरे दिल में उनके लिए कोई कमी नहीं है। मुझे उम्मीद है कि आगे भी यही स्थिति बनी रहेगी। वह बड़ी सियासतदान हैं, मैं तो एक छोटा कार्यकर्ता हूं। पर जब वह रामपुर आई थीं। तब वह मेरी मेहमान थीं। उन्होंने महसूस किया होगा कि मेरा उनके प्रति स्नेह किस तरह का है। मेरा उनसे जुड़ाव है।

आजम के जेल से छूटने के बाद अफवाह उड़ी थी कि वह बसपा ज्वाइन कर सकते हैं।
‘मैं ऐसी बात नहीं करता जो दुख का कारण बने’
एएनआई से बातचीत में आजम ने कहा- कांशीराम से भी मेरा रिश्ता काफी पुराना रहा है। यह शायद बहुतों को मालूम न हो कि वह सुबह चार बजे मेरे पास आते थे। उन्हें मालूम था कि मैं फज्र की नमाज पढ़ता हूं। वह मुझसे कहते थे कि मैं ऐसे ही वक्त आता हूं ताकि आप मिल जाएं।
उन्होंने कहा- उनसे मिलने पर आधा या एक घंटा बात होती थी। मेरा उनके बड़ों से भी रिश्ता रहा है। मैं ऐसा नहीं हूं कि कोई ऐसी बात करूं या कहूं जो दुख का कारण बन जाए। शिकायत का सबब बन जाए। मुझे अगर मिलना होगा तो जरूरी नहीं कि कोई राजनीतिक कारण हो।
आजम ने कहा- हमारी कुछ मानवीय जरूरतें भी हो सकती हैं, समाजी भी हो सकती हैं। उसके लिए हम मिल ही सकते हैं। कभी भी जरूरत होगी तो हम मिल सकते हैं। मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने कोई ऐसी बात नहीं बोली, जिससे मेरे दिल को ठेस पहुंचे।

आजम बोले- जरूरी नहीं कि हम केवल राजनीतिक रूप से ही मिले।
’10 साल बहुत ही सख्त गुजरे हैं’
उन्होंने कहा- उनकी जो राजनीतिक शिकायत है। उसका जवाब उनके स्तर के लोग ही बेहतर तरीके से दे पाएंगे। अब वो देंगे या नहीं देंगे, वो बेहतर जानते हैं। मैं पिछले 8-10 साल से ऐसे हालात का शिकार हूं कि मुझे यही नहीं मालूम कि कौन-सा पार्क कहां था, अब कहां है।
आजम ने कहा- यह 10 साल बहुत ही सख्त गुजरे हैं। मुझे मालूम नहीं आने वाला समय कैसा होगा। अगर सत्ता में आते हैं, जिसकी उम्मीद की जा सकती है। तो कोशिश की जाएगी कि उनकी शिकायतों का समाधान हो। आगे कोई ऐसा मौके न मिले उन्हें। आगे जो समाजी और राष्ट्र के लिए काम है। उन पर किसी तरह की ऊंच-नीच की बात आए।

