लखनऊ : सीएम योगी ने लखनऊ में कहा- आज कोई किसी बेटी को छेड़ने का दुस्साहस नहीं कर सकता। अगर करेगा तो अंजाम वह जानता है। अगर नहीं जानता है तो मुझे लगता है कि वह अपने डेथ सेंटेंस (मृत्युदंड) पर खुद साइन कर रहा है।
उन्होंने कहा-

2017 से पहले भर्ती में पारदर्शिता की कमी थी। भाई-भतीजावाद था। भर्ती का एग्जाम कोई देता था, लेकिन नियुक्ति किसी और की होती थी। इसलिए भर्ती आते ही युवाओं के मन में सवाल उठता था कि बिना सिफारिश या लेन-देन के नौकरी कैसे मिलेगी। लेकिन अब ऐसा नहीं है।
सीएम ने कहा- आप गिनते जाइए, हमने साढ़े नौ लाख नौकरी दी है। अगले 6 महीने में एक लाख नौजवानों को जॉइनिंग लेटर देंगे। अब प्रदेश में दंगा नहीं होता है। हम कभी-कभी दंगे की मॉक ड्रिल कराते हैं, जिससे लोग भूल नहीं जाएं कि दंगा कैसे होता है।
योगी ने रविवार को लोकभवन में पुलिस उपनिरिक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए।

योगी ने लखनऊ में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस में भर्ती हुए 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए।
अब कोई माफिया असलहा लहराते हुए खुलेआम नहीं घूम सकता
योगी ने कहा- पुलिस में भर्ती की प्रक्रिया पारदर्शी हो तो व्यवस्था में बदलाव लाया जा सकता है। 2017 से पहले यूपी के लोगों को बाहर अपनी पहचान बताने में भी झिझक होती थी। प्रदेश में दंगे और लंबे समय तक कर्फ्यू रहता था। बरेली, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई जगहों पर लंबे समय तक दंगे हुए। माफिया का दबदबा इतना था कि प्रशासन, पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए भी चुनौती बनी रहती थी।
माफिया के काफिले के सामने न्यायिक अधिकारी का वाहन तक रोक दिया जाता था। आज क्या कोई माफिया असलहा लहराते हुए खुलेआम घूम सकता है या दंगा करने का दुस्साहस कर सकता है? पहले जिस व्यक्ति के पास क्षमता थी, वह बेटी को बाहर पढ़ाने भेज देता था। जिसके पास क्षमता नहीं थी, वह बेटी को घर पर बैठाने को मजबूर था, क्योंकि बाहर निकलेगी तो कोई शोहदा उसे छेड़ेगा।
पहले भाई-भतीजावाद के कारण भर्ती नहीं हो पाती थी
योगी ने कहा- यूपी ने जो परसेप्शन बदला है, वह यूपी पुलिस ने बदला है। जिस पुलिस को 25 करोड़ लोगों ने विश्वास का प्रतीक बनाया है। लोग कहते हैं कि यूपी मॉडल को उतार देते हैं। यह बदलाव पुलिस में किए गए सुधारों से आया है। 2017 में पुलिस के आधे से ज्यादा पद खाली थे और भर्ती पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की रोक थी। 4 लाख पुलिसकर्मियों की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 2 लाख पुलिसकर्मी थे। पहले भाई-भतीजावाद के कारण भर्ती नहीं हो पाती थी।

मंच पर सीएम योगी और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना बात करते नजर आए।
पुलिसकर्मी खपरैल के नीचे सोते थे
सीएम ने कहा- पहले पुलिस के बैरक भी बदहाल थे। लखनऊ में वे खुद देखने गए तो पुलिसकर्मी खपरैल के नीचे सो रहे थे। तब लगा कि पुलिस व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। इसके बाद हर जिले की पुलिस लाइन में बैरक की व्यवस्था की गई। यूपी के 56 जिलों में बड़े पुलिस बैरक बनाए गए हैं।
दशकों से लंबित पुलिस लाइनों का निर्माण कराया गया। पुलिस लाइन, पुलिस की रीढ़ होती है। पहले पीएसी को भंग कर दिया गया था। उसकी 34 कंपनियां खत्म कर दी गई थीं। हमने उनका फिर से गठन किया। आज जब कहीं चुनाव होते हैं तो यूपी से 20 से 40 कंपनी पुलिस की मांग की जाती है।
जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे हमेशा बोलते रहेंगे
योगी ने कहा- 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण युवाओं में निराशा और हताशा थी। पहले भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल उठते थे, फिर चयन प्रक्रिया पर। पेपर लीक के मामले भी सामने आते थे। 2017 में सरकार ने तय किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाएगी और सुधार किए जाएंगे।
भर्ती आयोगों और बोर्ड की प्रक्रिया में बदलाव किया गया। ग्रुप-3 और ग्रुप-4 में इंटरव्यू की व्यवस्था खत्म की गई। जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे हमेशा बोलते रहेंगे। जिन्होंने अपनी अक्षमता के कारण यूपी को बीमारू बनाया था, उन्हें यूपी पुलिस पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उनके निकम्मेपन को यूपी और देश देख चुका है।

कार्यक्रम में डीजीपी समेत पुलिस विभाग के बड़े अफसर शामिल हुए।
110 एकड़ पुलिस जमीन पर भी कब्जा हो गया था
यूपी पुलिस की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साइबर सिक्योरिटी। इसके लिए हर जिले में साइबर थाना स्थापित किया गया है। यूपी पुलिस ने वह कर दिखाया है, जो पहले असंभव लगता था। हर दिन हमारे सामने नई प्रतिस्पर्धा है। यूपी में फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट बनाया गया। पहले प्रदेश में सिर्फ दो फॉरेंसिक लैब थीं।
फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के लिए जमीन तलाशने के दौरान पता चला कि पुलिस की जमीन पर कब्जा है। जांच में सामने आया कि पुलिस की 110 एकड़ जमीन राजस्व रिकॉर्ड में किसी और के नाम दर्ज करा दी गई थी और वहां प्लॉटिंग की तैयारी थी। सरकार ने एफआईआर दर्ज कराई।
इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने सरेंडर कर जमीन वापस करने की बात कही। आज यूपी के सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट है। 2017 से पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पहले एक फाइल सालों तक घूमती रहती थी और कोई न कोई उस पर टिप्पणी लगा देता था। एक फाइल 1973 से चल रही थी। इसके बाद सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया।

