वाराणसी : ‘यूपी में योगी की पुलिस बहुत मारती है। अब यहां नहीं आएंगे।’ भोपाल से वाराणसी लूट करने आए लुटेरों ने व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे माफी मांगी। पुलिस के सामने हाथ जोड़कर सुधरने का एक मौका देने के लिए गिड़गिड़ाते रहे। लुटेरों के नाम शब्बीर और मसल्लाह हैं।
3 अगस्त की तड़के पुलिस ने एनकाउंटर में दोनों को गिरफ्तार किया था। मुठभेड़ में दोनों के पैर में गोली मारी गई थी। इन्होंने 16 जुलाई को सर्राफा कारोबारी के कर्मचारी से 27 किलो चांदी की लूट की थी। पुलिस ने एनकाउंटर के बाद 4 किलो चांदी रिकवर कर ली है।
एडीसीपी काशी जोन वैभव बांगर ने बताया- 4 अगस्त को दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। पेशी से पहले दोनों ने पुलिस से माफी मांगते रहे। दोनों मध्यप्रदेश के ईरानी गैंग के मेंबर्स हैं। इनके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।

पुलिस और एसओजी ने मुठभेड़ में ईरानी गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

पकड़े गए आरोपी मसल्लाह ने कहा- अब कभी यूपी नहीं आएंगे।
क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर की थी लूट
- वाराणसी की आभूषण मंडी सुड़िया में हेमा ज्वेलर्स नाम से शॉप चलाने वाले विनय सोनी ने बताया- 16 जुलाई शाम 7 बजे मेरा कर्मचारी 27 किलो 327 ग्राम चांदी लेकर रेशम कटरा स्थित महालक्ष्मी ज्वेलर्स जा रहा था। चांदी 26 पीस में एक झोले में रखी थी। रेशम के साथ महालक्ष्मी ज्वेलर्स का एक कर्मचारी भी था।
- बाइक से दोनों गोविंदपुरा मोड़ पहुंचे थे। तभी दो अज्ञात बाइक सवारों ने उन्हें रोक लिया। खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताते हुए हड़काया। पूछा- झोले में क्या है। इन्होंने बताया चांदी है, तो उन्होंने झोला ले लिया। कहा कि मालिक को बुलाकर क्राइम ब्रांच लेकर आओ। रेशम ने मौके से ही मुझे फोन किया।
- मैं अपने अन्य कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचा। इसके बाद पुलिस थाने पहुंचा। वहां पूरी घटना बताई तो पता चला कि दोनों लुटेरे थे। क्राइम ब्रांच का फर्जी अफसर बनकर इन्होंने लूट की थी। इसके बाद लंका थाने में एफआईआर करवाई गई थी। इसके बाद से ही आरोपियों की तलाश की जा रही थी ।

वाराणसी की चौक पुलिस ने सोमवार की रात मुठभेड़ के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया था।

पुलिस के मुताबिक बदमाशों को रोका गया तो उन्होंने गोली चलाई। जवाबी फायरिंग में उनके दोनों पैर में गोली लगी।
300 सीसीटीवी फुटेज और क्राइम रिकाॅर्ड से पहचान हुई
काशी जोन एडीसीपी वैभव बांगर ने बताया- वारदात के बाद पुलिस ने 300 सीसीटीवी चेक किए। इससे दोनों बदमाश नजर आए और उनका रूट क्लीयर हुआ। इसके बाद एमपी के ईरानी गैंग के होने का शक हुआ। दो संदिग्धों की तलाश शुरू की गई। सोमवार रात एसओजी ने लंका थानाक्षेत्र के लौटुबीर में मुठभेड़ के बाद दोनों को गिरफ्तार किया।
एडीसीपी ने बताया – दोनों ने इस लूट में मुंबई के ईरानी डेरा के हाफिज और जुल्फेकार की मदद ली थी। साथ ही शब्बीर की पत्नी पाकीजा की भी पुलिस को तलाश है। पाकीजा ही सर्राफा के यहां पहुंचकर चांदी बेचती है। इन्होंने रांची के अमान अली की बलेनो बुक कराई थी। उससे वाराणसी और लूट के बाद प्रयागराज चले गए थे। वहां कार छोड़ दी थी।
फिर बस से जबलपुर और फिर वहां से पिपरिया गए थे। मुठभेड़ में पकड़े गए शब्बीर के ऊपर 11 मुकदमे और तो मसल्लाह के ऊपर 2 मुकदमे दर्ज हैं।

एडीसीपी काशी जोन वैभव बांगर ने बताया एसओजी और और चौक थाने की पुलिस टीम ने दोनों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस बनकर कारोबारियों को निशाना बनाता है ईरानी गैंग
- पुलिस के मुताबिक, ईरानी गैंग के लोग खानाबदोश हैं। खुद को ईरानी कहते हैं। ज्यादातर यूपी, बिहार, एमपी और झारखंड में ऑपरेट करते हैं। चश्मा बेचने के कारोबार की आड़ में अपराधों को अंजाम देते हैं। इनकी लैंग्वेज भी आम भाषा से अलग है। न वो ईरानी है और न ही इराकी और न ही उर्दू। ऐसे में ये किसी अन्य के सामने आसानी से अपनी प्लानिंग को अंजाम दे देते हैं।
- ईरानी गैंग का वारदात करने का तरीका अलग किस्म का है। यह गैंग पुलिसकर्मी, क्राइम ब्रांच, एसटीएफ बनकर ही लोगों, कारोबारियों को अपना शिकार बनाता है। गैंग के सरगना अनुज डेहरा और मेहंदी हसन के इशारे पर बदमाश कई राज्यों में वारदात करते हैं। लूट के जेवर को बेचने के बाद गिरोह के बदमाश दूसरे राज्य या शहरों में फरार हो जाते हैं।
- इस गैंग का मुख्य गढ़ मध्य प्रदेश के भोपाल में ‘ईरानी डेरा’ माना जाता है, जहां से पूरे गैंग का नेटवर्क संचालित होता है। पुलिस के मुताबकि, वाराणसी में ईरानी गैंग इसके पहले भी वारदात को अंजाम दे चुका है। साल 2022 में 24 मार्च को कबीरचौरा-पियरी मार्ग पर गाजीपुर के कारोबारी से पुलिस चेकिंग के नाम पर गैंग ने 8 लाख रुपए से भरा बैग उड़ा लिया था।—

