- जीएलए विश्वविद्यालय में ‘आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडस सिस्टम’ पर एक दिवसीय कार्यशाला
दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा ‘आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडस सिस्टम’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट जशुभाई हीराभाई चौधरी, फाइनेंस कमेटी पीसीआई के चेयरमैन प्रो. विभु साहनी, जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता एवं कुलसचिव अशोक कुमार सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। यह कार्यशाला पीसीआई के आईटी विभाग द्वारा जीएलए विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के फार्मेसी कॉलेजों के निदेशक, प्राचार्य, शिक्षक एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
‘आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडस सिस्टम’ फार्मेसी शिक्षा में पारदर्शिता
मुख्य अतिथि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट जशुभाई हीराभाई चौधरी ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि ‘आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडस सिस्टम’ फार्मेसी शिक्षा में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह सिस्टम आधार आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के माध्यम से रियल टाइम में उपस्थिति दर्ज करता है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिक्षक वास्तव में संस्थान में कार्यरत हैं या केवल कागज़ों तक सीमित हैं। आने वाले समय में सभी संस्थानों को यह समझना होगा कि यह कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं, बल्कि पीसीआई का एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है, जिसे पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाएगा। अभी कुछ संस्थान इसे हल्के में ले रहे हैं, लेकिन भविष्य में हर संस्थान को किसी न किसी रूप में इसका हिस्सा बनना ही पड़ेगा। यह प्रणाली फार्मेसी शिक्षा के पूरे सिस्टम को सुधारने की क्षमता रखती है।
मुख्य अतिथि ने कहा कि वर्षों तक फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को केवल एक रेगुलेटरी बॉडी के रूप में देखा गया, जिसका काम सिर्फ इंस्पेक्शन और अप्रूवल तक सीमित रहा। लेकिन अब परिषद का दृष्टिकोण बदल चुका है। नीतियां तभी प्रभावी होंगी जब उन्हें ज़मीनी स्तर पर समझा और लागू किया जाए। इसी उद्देश्य से वे स्वयं देशभर में संस्थानों का दौरा कर रहे हैं और शिक्षकों, निदेशकों तथा अन्य स्टेकहोल्डर्स से सीधे संवाद कर रहे हैं।
स्पष्ट शब्दों में चेतावनी
मुख्य अतिथि ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में बिना वास्तविक उपस्थिति के काम करना संभव नहीं होगा। सभी संस्थानों को क्वालिटी और रेगुलेटरी कंप्लायंस स्टैंडर्ड्स को हर हाल में पूरा करना होगा। उन्होंने संस्थानों से अपील की कि वे इस सिस्टम को बोझ नहीं, बल्कि सुधार और विश्वास स्थापित करने के अवसर के रूप में लें।
कार्यशाला में पीसीआई के आईटी विभाग के प्रतिनिधि सौरभ कुमार ने उपस्थित प्रतिभागियों को ‘आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडस सिस्टम’ पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी तथा तकनीकी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सवालों के भी उत्तर दिए। उन्होंने बताया कि पीसीआई द्वारा सभी अप्रूव्ड फार्मेसी इंस्टीट्यूशन्स में ‘आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडस सिस्टम’ को अनिवार्य किया गया है, ताकि देशभर में फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की बुनियाद है और फार्मेसी शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, दक्ष और नैतिक फार्मसिस्ट तैयार करना होना चाहिए।
फार्मेसी विभाग के निदेशक प्रो. कमल शाह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों की जानकारी दी। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. योगेश मूर्ति ने कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सोनिया सिंह ने की। इस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं, कर्मचारी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

