दैनिक उजाला, मथुरा : भारतीय तकनीकी उद्योग इन दिनों वैश्विक स्तर पर बदलते परिदृश्यों को लेकर चिंतित है, विशेषकर उस निर्णय को लेकर जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय पेशेवरों के लिए एच-1बी वीज़ा पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है। इस बढ़ी हुई शुल्क व्यवस्था को विशेषज्ञ भारतीय आईटी और तकनीकी प्रतिभा के लिए गंभीर चुनौती के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि इससे न केवल विदेशी अवसरों का मार्ग कठिन होगा, बल्कि भारतीय युवाओं के वैश्विक कॅरियर निर्माण पर भी सीधा प्रभाव पड़ेगा।
इसी संदर्भ में जीएलए विश्वविद्यालय मथुरा के सैटरैंगल क्लब ने अंतर-विश्वविद्यालय (इंटर-यूनिवर्सिटी) स्तर पर युवा संसद 5.0 का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, पूर्व छात्र और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र हुए और इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा करते हुए इसके विस्तृत आयामों को समझने का प्रयास किया।
कुलपति प्रो. अनूप गुप्ता के मार्गदर्शन तथा क्लब की मेंटर डा. दिव्या गुप्ता के निर्देशन में आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों को वैश्विक नीतियों की दिशा, रोजगार अवसरों के नए मानकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की जटिलताओं पर सोचने का व्यापक अवसर प्रदान करने वाला रहा। कार्यक्रम के संचालन एवं समग्र शैक्षणिक वातावरण को मजबूती देने में अंग्रेज़ी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. रमान्जनेय उपाध्याय की उपस्थिति और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा।
कार्यक्रम के दौरान डा. दिव्या गुप्ता ने प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों अमन यादव, मोहित सिंह, विश्व प्रकाश राय, सुरभि अग्रवाल, मुकुल दुबे, अतुल मौर्य, आयुष दुबे, प्रियांशी गुप्ता एवं राहुल सिंहकृका परिचय कराया, जिन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वैश्विक रोजगार बाज़ार में प्रतिस्पर्धा दिन-ब-दिन जटिल होती जा रही है। ऐसे समय में भारतीय युवाओं को केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं बल्कि, नीतिगत समझ, अंतरराष्ट्रीय कार्य-प्रणाली और बदलावों के प्रति सक्रियता भी आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि शुल्क वृद्धि जैसी नीतियां केवल आर्थिक बोझ नहीं बढ़ातीं बल्कि, अवसरों की उपलब्धता, कंपनियों की भर्ती रणनीति और प्रतिभा-प्रवास के संतुलन को भी प्रभावित करती हैं। इसी चर्चा में प्रमोद कुमार जोशी के विचारों ने भी गहरा प्रभाव छोड़ा, जिन्होंने नीति-निर्माण, उसके दीर्घकालिक प्रभावों और युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में उपस्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर राजकुमार और बॉबी सिंह ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते साइबर अपराधों के बीच युवाओं को डिजिटल सुरक्षा, डेटा संरक्षण और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की बारीकियों को समझना अत्यंत आवश्यक है। शोध प्रमुख श्वेता गोलश ने नीतिगत साक्षरता और शोध की भूमिका पर बल दिया वहीं वित्त विशेषज्ञ सीए अमित कुमार गुप्ता ने युवाओं को वैश्विक अर्थव्यवस्था, रोजगार संरचना और आर्थिक नीतियों की दिशा को समझने पर विशेष जोर दिया।
अंतिम सत्र में पवन पांडेय द्वारा संचालित जीवंत चर्चा ने माहौल को और भी विचारपूर्ण बना दिया, जिसमें छात्रों ने न केवल एच-1बी वीज़ा शुल्क वृद्धि के प्रभावों पर अपने विचार रखे, बल्कि भारत में तकनीकी उद्योग के भविष्य, स्टार्टअप संस्कृति के अवसरों, अन्य देशों में रोजगार विकल्पों, करियर स्थायित्व और नीति-परिवर्तन के प्रति सजग रहने पर भी विस्तृत विमर्श किया। छात्रों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए भारतीय प्रतिभा को बहुआयामी कौशल, अंतरराष्ट्रीय नीति-समझ, तकनीकी विशेषज्ञता और नवाचार क्षमता विकसित करनी होगी।
कार्यक्रम के अंत में युवा संसद 5.0 के विजेताओं की घोषणा की गई, जिसमें रूलिंग टीम से आशीमा गर्ग प्रथम, कुलदीप आलोक तिवारी द्वितीय और अनुष्का सिंह तृतीय स्थान पर रहीं; मीडिया टीम में वर्तिका सिंह प्रथम, अभय कुमार द्वितीय और शांदली लक्ष्मी तृतीय स्थान पर रहीं; जबकि विपक्ष टीम से हर्ष अग्रवाल प्रथम, रुज़ुल पाठक द्वितीय और भूमिका सक्सेना तृतीय स्थान पर रहीं। प्रतिभागियों ने बताया कि इस मंच ने उन्हें न केवल वक्तृत्व कला और तर्क-वितर्क की समझ दी, बल्कि वैश्विक नीतियों के तकनीकी और सामाजिक प्रभावों को गहराई से जानने का अवसर भी प्रदान किया। युवा संसद 5.0 ने यह सिद्ध किया कि जीएलए विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे अवसर प्रदान करता है जो छात्रों को बौद्धिक रूप से समृद्ध, सामाजिक रूप से सजग और वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

