- Fast Track Court: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेप और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामलों के त्वरित और समयबद्ध निपटारे के लिए 850 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को मंजूरी दे दी है
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बाल यौन शोषण और दुष्कर्म के मामलों में न्याय प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी है कि ऐसे मामलों के लिए 850 फास्ट-ट्रैक अदालतों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को मंजूरी मिली है।
यह घोषणा बुधवार, 4 नवंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद, एक कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान की गई। इसके अलावा क्लीन एनर्जी मिशन, क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और डेटा आधारित विकास के लिए भी बड़ा घोषणा की गई है।
बाल यौन शोषण के मामलों के लिए विशेष अदालत
वैष्णव ने कहा कि मोदी सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के मामलों से सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार का यह हालिया ऐलान देशभर में पहले से स्थापित विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (FTSC) की पहल को आगे बढ़ाता है। इन अदालतों में पोक्सो मामले सुनने वाली अदालतें भी शामिल हैं।
यह केंद्र द्वारा संचालित योजना अक्टूबर 2019 में शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज लंबित मामलों का समयबद्ध विचारण और निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
अभी तक हैं 775 फास्ट ट्रैक अदालतें
विधि और न्याय मंत्रालय के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 398 विशेष पोक्सो अदालतों सहित 775 फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें काम कर रही थीं। इन अदालतों की शुरूआत आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2018 के लागू होने और यौन अपराधों से जुड़े मामलों के जल्द से जल्द निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद शुरू की गई थी। ये अदालतें खास तौर पर दुष्कर्म और बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई हैं।
स्वच्छ ऊर्जा के लिए उठाए कदम
केंद्रीय केबिनेट का एक बड़ा फैसला भारत के क्लीन एनर्जी मिशन से जुड़ा है। इसके तहत कैबिनेट ने 92 GWh ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज योजना को मंजूरी दी है। इसमें से 30 GWh बैटरी स्टोरेज और 60 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज के लिए रखा जाएगा। इस योजना का मकसद स्वच्छ ऊर्जा भंडारण को पूरे देश में मजबूती से लागू करना है।
क्रिटिकल मिनरल्स के लिए नई योजना
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। इसके तहत क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के लिए एक नई योजना को हरी झंडी दिखाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य खनन या रीसाइक्लिंग से प्राप्त कच्चे माल को इस तरह प्रोसेस करना है ताकि वह सीधे मैन्युफैक्चरिंग के उपयोग में आ सके।

