काठमांडू : नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है।
त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ कामयाबी मिली है। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मिट्टी और गाद हटा रहे हैं। सुरंग में 6 इंच का छेद कर पाइप के जरिए हवा पहुंचाई जा रही है।
अब इसे बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है, ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके।
26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है।
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नेपाल के देवीघाट में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ में तबाह हुए घरों का एरियल व्यू।

नुवाकोट में घरों की छतों के ऊपर से बाढ़ का पानी और मलबा गुजरने के निशान दिखाई दे रहे हैं।

रसुवा से रेस्क्यू लोगों को एयरलिफ्ट करने वाले बैरक के बाहर लापता परिजन का इंतजार करती महिला रो पड़ी।

नुवाकोट के देविघाट में बाढ़ से तबाह घर में सामान तलाशने के बाद बच्ची का पैर कीचड़ से सना नजर आया।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से लोगों को सुरक्षित निकालती नेपाली सेना



भारत ने नेपाल के लिए 68.5 टन राहत सामग्री भेजी

नेपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को दोबारा जोड़ने के लिए भारत और चीन से कुल 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है।
भारत ने अब तक 68.5 टन राहत सामग्री भेजी है। इसके साथ ही सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए टनल विशेषज्ञों, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों को भी नेपाल भेजा गया है।
भारत ने कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, हाइजीन किट समेत राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। इसके अलावा 230 फीट लंबे बेली ब्रिज बनाने के लिए सामान भी नेपाल पहुंचाए गए हैं। भारत जल्द ही 7 और बेली ब्रिज के लिए सामान और टेक्निकल टीम भेजेगा।
‘चाय के लिए नहीं रुकते तो जान जा सकती थी’
तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि वे तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहे थे। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ। उन्हें बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ की तेज धारा में बह गईं और उनका कोई पता नहीं चला।
एलावेनी ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि रास्ते में इतनी बड़ी आपदा आने वाली है। उन्होंने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। खैर, हमें दर्शन नहीं मिले, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए।” उन्होंने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।

नेपाल में बाढ़ के बाद मलबे में दबा सोलर पावर प्लांट



शवों को सुरक्षित रखने के लिए नेपाल ने मदद मांगी
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों को सुरक्षित रखने के लिए दूसरे देशों से मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि नदियों के निचले इलाकों से सैकड़ों शव मिले हैं और लंबे समय तक पानी में रहने के कारण उनके जल्दी खराब होने का खतरा है।
खनाल ने बताया कि नेपाल में शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा सीमित है। इसलिए सरकार विदेशी देशों से फ्रीजर उपलब्ध कराने में सहयोग मांग रही है।

