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Wed. Mar 4th, 2026

आजादी के 75 साल बाद पाकिस्तान में हिंदू शादियों को मिली मान्यता

नई दिल्ली : अंग्रेजों से स्वतंत्रता मिलने के 75 साल बाद अब पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को अपने रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करने की आजादी मिली है। भारत के पड़ोसी देश में हिंदू मैरिज अधिनियम 2017 के बनाए जाने के पांच साल बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इसको लेकर नियम अधिसूचित किए गए हैं। इन्हें ‘इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र हिंदू विवाह नियम 2023’ का नाम दिया गया है। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू लंबे समय से इस कानून के क्रियान्वयन की मांग करते आ रहे थे, जिस पर अब जाकर आंशिक रूप से अमल होता दिख रहा है।

हिंदू विवाह से जुड़े ये नियम फिलहाल इस्लामाबाद में ही लागू हुए हैं, लेकिन इसे एक शुरुआत माना जा रहा है। इन नियमों को पाकिस्तान के सभी संघीय क्षेत्रों की परिषदों के पास क्रियान्वयन के लिए भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि जल्दी है पंजाब, खैबर पख्तूनवा और ब्लूचिस्तान आदि पाकिस्तान के राज्यों में भी ये नियम लागू किए जाएंगे। जानकारों के अनुसार, सभी राज्य विवाह के अलग नियम बनाएं, इसके बजाए तकनीकी और राजनीतिक रूप से यही सही होगा कि पाक के दूसरे इलाकों में भी इन्हीं नियमों को मान्यता दे दी जाए।

नियमों के अनुसार, विवाह अधिनियम के तहत नियुक्त ‘महाराज’ सरकार द्वारा अनिवार्य शुल्क के अलावा विवाह संपन्न कराने के लिए कोई पैसा नहीं लेगा। खबर के अनुसार, नियमों की धारा 7 विवाह को समाप्त करने और पुनर्विवाह से संबंधित मामलों से संबंधित है। ये नियम इस्लामाबाद में रहने वाले हिंदुओं को विवाह विवादों के मामले में ‘वेस्ट पाकिस्तान फैमिली कोर्ट्स एक्ट 1964’ के तहत अदालतों का रुख करने की भी अनुमति देते हैं।

हिंदू समुदाय के सदस्य जय प्रकाश ने कहा कि कई हिंदू स्थायी रूप से इस्लामाबाद में बस गए, और यह ‘‘आवश्यक’’ है कि आईसीटी प्रशासन स्थानीय समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए इस कानून को पूर्व प्रभाव से लागू करे। खबर में कहा गया है कि सुरक्षा चिंताओं के कारण सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों से प्रवासन के कारण इस्लामाबाद में हिंदू समुदाय के सदस्यों की संख्या बढ़ी है।

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