बस्ती : बस्ती में सरकारी अस्पताल के स्टाफ की बड़ी लापरवाही से एक प्रेग्नेंट महिला की जान पर बन आई। महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसका पति एंबुलेंस से सीएचसी लेकर आया। लेकिन, रास्ते में ही बच्चे के पैर बाहर आ गए।
एंबुलेंस जैसे ही सीएचसी परिसर में पहुंची, नर्स और अन्य स्टाफ बच्चे को बाहर निकालने के लिए उसके दोनों पैर पकड़कर खींचने लगे। इसके चलते स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ में नवजात का धड़ आ गया, जबकि सिर मां के गर्भ में ही फंसा रह गया।
इससे सीएचसी स्टाफ के हाथ-पैर फूल गए और महिला को उसी एंबुलेंस से एक नर्सिंग होम भेज दिया। वहां महिला के पति से बेड और खून की जांच के नाम पर 7 हजार रुपए वसूल लिए गए। नर्सिंग होम में इलाज में देरी होने पर पति बोलेरो से महिला को बस्ती मेडिकल कॉलेज ले गया।
वहां 2 घंटे ऑपरेशन के बाद नवजात का शव निकाला गया। तब जाकर किसी तरह महिला की जान बच सकी। घटना 8 अप्रैल की है। पति ने सोमवार को इस मामले में जांच की मांग की है। मामला कलवारी थाना क्षेत्र का है।

महिला के पति उसे प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस से लेकर सीएचसी कुदरहा पहुंचे थे।
मुरादपुर की रहने वाली प्रेमा देवी (27) प्रेग्नेंट थी। 8 अप्रैल को उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इस पर प्रेमा को उनके पति नीरज कुमार एंबुलेंस से सीएचसी कुदरहा लेकर पहुंचे। नीरज ने बताया कि रास्ते में पत्नी को और तेज दर्द होने लगा। साथ ही नवजात का पैर भी बाहर आने लगा।
एंबुलेंस जब सीएचसी परिसर पहुंची, तो स्टाफ नर्स कुसुम आई। उसके साथ सीएचसी के और भी कर्मचारी थे। कुसुम ने प्रेमा को दर्द का इंजेक्शन दिया। इसके बाद एंबुलेंस में ही नवजात का पैर पकड़कर बाहर खींचने लगी। ज्यादा तेज झटका देने से नवजात का सिर धड़ से अलग हो गया और उसकी मौत हो गई।
इसके बाद घबराए सीएचसी स्टाफ ने प्रेमा की हालत गंभीर बताकर उसे पास के एक नर्सिंग होम भेज दिया। नीरज कुमार ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल में भी बिना इजाजत ऑपरेशन की तैयारी की गई। खून की जांच और बेड चार्ज के नाम पर करीब 7 हजार रुपए वसूल लिए गए।
लेकिन, ऑपरेशन में देर होने पर हम लोग प्रेमा को वहां से लेकर ओपेक मेडिकल कॉलेज की कैली यूनिट में पहुंचे। यहां ऑपरेशन करके नवजात के सिर को बाहर निकाला गया।

डॉ. कल्पना मिश्रा ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई।
डॉक्टर बोलीं- महिला की जान जा सकती थी
कैली अस्पताल की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कल्पना मिश्रा ने बताया कि मरीज गंभीर स्थिति में आई थी। जांच में पाया गया कि बच्चे का धड़ बाहर आ चुका था। सिर गर्भ में फंसा था। सामान्य प्रसव संभव नहीं होने पर तत्काल ऑपरेशन कर बच्चे का सिर निकाला गया। अब महिला की हालत ठीक है। 2 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद महिला की जान बचाई जा सकी।
प्रेमा के पति नीरज कुमार ने कहा कि सीएचसी स्टाफ की लापरवाही से यह घटना हुई है। प्राइवेट अस्पताल ने भी बिना इजाजत ऑपरेशन की तैयारी की। प्रशासन से हमारी यही मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं, सीएमओ डॉक्टर राजीव निगम ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से पूरे मामले की जानकारी करेंगे।
2 घंटे का जटिल ऑपरेशन और विशेषज्ञों की राय
मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कल्पना मिश्रा ने बताया कि जब महिला वहां पहुंची, तो उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। सामान्य प्रसव संभव नहीं था, इसलिए तत्काल इमरजेंसी ऑपरेशन का फैसला लिया गया। करीब 2 घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद गर्भ में फंसे नवजात के सिर को बाहर निकाला गया। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत के बाद महिला की जान बचाई जा सकी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चा ब्रीच (पैर की तरफ से) आता है, तो वह एक हाई-रिस्क केस होता है। ऐसी स्थिति में सामान्य प्रसव (Normal Delivery) के बजाय सिजेरियन (C-Section) ही सुरक्षित विकल्प होता है। जबरन खींचने से गर्दन फंसने और इस तरह के घातक परिणाम होने का खतरा हमेशा बना रहता है।

