अयोध्या : पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO होंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को इसका ऐलान किया। मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया और एयरफोर्स में 39 साल काम किया।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या राम मंदिर का पहला सीईओ (चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) बनाया है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम का ऐलान किया गया। देवरिया के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया था।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा वायुसेना के पश्चिमी कमान के चीफ रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में नए सीईओ के के नाम पर मुहर लग गई। वह अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी अहम सैन्य जिम्मेदारी निभाई थी।
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को छह दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह इसी वर्ष 30 अप्रैल को रिटायर्ड हुए थे। वह देवरिया के रहने वाले हैं। आज सीईओ को लेकर सभी कयास धरे के धरे रहे गए और सैन्य अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ को लेकर सभी कयास धरे के धरे रहे गए और सैन्य अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ लड़ाकू पायलट रहे हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में IAF ज्वाइन की थी। NDA पुणे और एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल के पूर्व छात्र हैं।
मिश्रा ने अपने करियर में 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव हासिल किया। उन्होंने कई अहम कमांड और स्टाफ पदों पर जिम्मेदारी संभाली। वे Deputy Chief of Integrated Defence Staff (Operations) भी रहे। एक जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की Western Air Command की कमान संभाली थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे Western Air Command के प्रमुख थे।
उन्होंने हाल में दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत के S-400 सिस्टम की लोकेशन पता करने के लिए जासूसी नेटवर्क और स्लीपर सेल सक्रिय किए थे। उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है।
क्या होगा सीईओ का काम
सीईओ राम मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को संभालने और सरकारी एजेंसियों के साथ इसके कामकाज में तालमेल बिठाने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह पद इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अयोध्या भारत के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। सीईओ की नियुक्ति का फैसला राम मंदिर दान चोरी की जांच कर रही एसआईटी टीम की सिफारिश के बाद लिया गया।
पैनल ने ट्रस्ट को सौंपा था नाम
सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े की तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने देशभर से आए 5,585 आवेदनों की गहन स्क्रूटनी के बाद तीन शीर्ष योग्य अभ्यर्थियों का एक अंतिम पैनल तैयार कर मंगलवार को ट्रस्ट को सौंपा।

