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Wed. Sep 2nd, 2026

मथुरा में एक माह का 6047 यूनिट बिजली बिल 32 हजार रुपये, एक्सईएन शहरी से समाधान नहीं, एसई सिटी ने फोन तक नहीं उठाया

मथुरा : सदर क्षेत्र में एक घरेलू बिजली कनेक्शन पर एक माह में 6047 यूनिट खपत और 32,107 रुपये का बिल आने से उपभोक्ता हैरान है। घर में सीमित विद्युत उपकरण और महज दो एसी होने के बावजूद इतनी अधिक खपत दर्ज होने पर बिल की गणना पर सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ता का कहना है कि एसी भी 24 घंटे नहीं चलते और बिजली आपूर्ति भी लगातार नहीं रहती। मामले में स्थानीय स्तर पर शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं होने पर अब उच्चाधिकारियों से जांच की मांग की गई है।

सदर क्षेत्र निवासी भाजपा नेता तपेश भारद्वाज ने बताया कि उनके घर का बिजली कनेक्शन उनके पिता ब्रह्मा दत्त शर्मा के नाम से है। बिल में इतनी अधिक यूनिट देखकर वह चौंक गए। उनका कहना है कि यह किसी फैक्टरी या व्यावसायिक प्रतिष्ठान का कनेक्शन नहीं, बल्कि आवासीय घर का कनेक्शन है। घर में केवल दो एसी हैं और बिजली की आपूर्ति भी 24 घंटे नहीं रहती। इसके बावजूद एक माह में छह हजार से अधिक यूनिट की खपत दर्ज होना सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने बताया कि कनेक्शन का डिमांड लोड 4.50 दर्शाया गया है। इसके बावजूद इतनी अधिक खपत कैसे दर्ज हुई, यह जांच का विषय है। तपेश भारद्वाज का कहना है कि उन्होंने पहले भी नियमित रूप से बिल जमा किए हैं और यूपीपीसीएल की वेबसाइट पर बिल आने के बाद उसका भुगतान किया जाता रहा है।

यूपीपीसीएल की वेबसाइट पर बिल आने के बाद उसका भुगतान किया जाता रहा

एक्सईएन शहरी से शिकायत, समाधान नहीं

तपेश भारद्वाज के अनुसार उन्होंने मामले की जानकारी एक्सईएन शहरी कमर्शियल को भी दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि एक्सईएन शहरी की ओर से उन्हें बिजलीघर जाने की बात कह दी गई। इसके बाद उन्होंने एसई सिटी से फोन पर संपर्क करने का कई बार प्रयास किया, लेकिन फोन तक रिसीव नहीं किया गया।

उपभोक्ता का आरोप है कि यदि हर महीने बिल जमा होता रहा है तो विभागीय स्तर पर बिलिंग और मीटर रीडिंग की नियमित जांच क्यों नहीं हुई। अचानक इतनी बड़ी खपत दर्ज होने के बाद भी संबंधित अधिकारी समस्या सुनने और उसकी जांच कराने को तैयार नहीं हैं।

मंत्री से लेकर डीवीवीएनएल के वित्त निदेशक तक शिकायत

मामले को लेकर तपेश भारद्वाज ने अब मंत्री को व्हाट्सऐप के माध्यम से शिकायत भेजने के साथ ही डीवीवीएनएल के वित्त निदेशक को भी पूरे प्रकरण से अवगत कराया है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद सुनवाई नहीं होने के कारण उन्हें उच्च स्तर पर शिकायत करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

तपेश भारद्वाज ने कहा कि घर में सीमित विद्युत उपकरण हैं, दो एसी हैं जो लगातार नहीं चलते और 24 घंटे बिजली की आपूर्ति भी नहीं रहती। ऐसे में एक माह में 6047 यूनिट खपत का बिल आना गंभीर सवाल है। उन्होंने मांग की है कि मीटर, मीटर रीडिंग, बिलिंग रिकॉर्ड और पिछले महीनों की खपत की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए तथा यदि बिल में गलती है तो उसे तत्काल ठीक किया जाए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उपभोक्ता नियमित रूप से बिल जमा करता रहा, तो विभागीय स्तर पर इतनी असामान्य खपत की पहले ही जांच क्यों नहीं हुई? अब देखना है कि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला पहुंचने के बाद बिजली विभाग इस बिल की जांच कब कराता है और उपभोक्ता को राहत कब मिलती है।

वहीं एक्सईएन शहरी पंकज तिवारी ने बताया कि बिजली का बिल सही है। उन्होंने कहा कि 6047 यूनिट की खपत चार माह की है, न कि केवल एक माह की। अधिकारी के अनुसार उपभोक्ता द्वारा पहले जो बिल जमा किया गया था, उसकी राशि मौजूदा बिल में समायोजित यानी घटा दी गई है।

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