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उत्तराखंड में SIR को लेकर सिर्फ कांग्रेस परेशान, UKD-BSP शांत:2 विधायकों को नोटिस मिलना सबसे बड़ी वजह, दावा- गलत ढंग से नाम काटे जा रहे

देहरादून : उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि SIR के नाम पर सही मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है। वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि इसका मकसद मतदाता सूची की गलतियां दूर करना है और हर आपत्ति पर नियम के मुताबिक सुनवाई की जा रही है।

विवाद तब और बढ़ गया जब कांग्रेस के ही दो मौजूदा विधायकों के नाम को लेकर आपत्तियां सामने आईं। मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन के मामले में उनकी और उनके पिता की उम्र को लेकर सवाल उठे। वहीं पिरान कलियर विधायक फुरकान अहमद का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए भी आपत्ति दर्ज होने की बात सामने आई। फुरकान अहमद ने इस मामले में कोर्ट जाने की बात कही है।

इन घटनाओं के बाद कांग्रेस का सवाल है कि SIR में आने वाली हर आपत्ति की पहले जांच हो रही है या शिकायत मिलते ही मतदाता को नोटिस भेज दिया जा रहा है। दूसरी ओर, इस पूरे मुद्दे पर UKD, SP और BSP की कांग्रेस जैसी सक्रियता नजर नहीं आ रही है।

कांग्रेस को सबसे बड़ा डर वोट कटने का

कांग्रेस का सबसे बड़ा आरोप है कि SIR के दौरान फॉर्म-7 के जरिए सही मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है। हरिद्वार ग्रामीण की विधायक अनुपमा रावत ने भी आरोप लगाया कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल सही मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने एक वर्ग के मतदाताओं को खास तौर पर निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम, उम्र और दूसरे विवरण में गड़बड़ियां मिली हैं। जुलाई के अंत तक निर्वाचन विभाग ने 19 लाख से ज्यादा मतदाताओं के विवरण में विसंगतियां मिलने की बात कही थी। करीब 5.26 लाख मतदाता ऐसे भी थे, जिनका रिकॉर्ड मैप नहीं हो पाया था।

कांग्रेस का कहना है कि अगर किसी गलत शिकायत के आधार पर किसी मतदाता को नोटिस भेजा जाता है तो पहले उसे अपना नाम और पहचान सही साबित करने के लिए दौड़ना पड़ेगा।

आपत्ति करने वालों पर भी उठ रहे सवाल

दूसरा बड़ा सवाल उन लोगों की पहचान को लेकर है, जिन्होंने मतदाताओं के नाम पर आपत्तियां दर्ज कराईं। देहरादून के कुछ बूथों को लेकर कांग्रेस ने दावा किया कि फॉर्म-7 में दिए गए कुछ मोबाइल नंबर दिल्ली, बरेली और गाजियाबाद के सामने आए।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कुछ नंबरों पर फोन करने पर संबंधित लोगों ने उत्तराखंड में किसी मतदाता के खिलाफ आपत्ति करने से इनकार किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने जांच की मांग की है। निर्वाचन अधिकारियों ने भी कहा है कि मामला सामने आया है और ERO स्तर पर इसकी जांच की जा रही है।

चुनाव नजदीक, इसलिए हर बदलाव पर नजर

SIR को लेकर राजनीति बढ़ने की तीसरी बड़ी वजह विधानसभा चुनाव है। उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में मतदाता सूची में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है।

14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में राज्य में करीब 71.33 लाख मतदाता थे। निर्वाचन विभाग के मुताबिक अंतिम मतदाता सूची 15 सितंबर को जारी होनी है।

इसलिए अभी से राजनीतिक दल हर नाम, हर आपत्ति और हर नोटिस पर नजर रख रहे हैं।

दो कांग्रेस विधायकों के नाम पर आपत्ति से बढ़ा विवाद

  • काजी निजामुद्दीन: मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन की उम्र और उनके पिता मोहम्मद मोहीउद्दीन की उम्र को लेकर आपत्ति सामने आई। निजामुद्दीन का जन्म 1974 में हुआ था, जबकि उनके पिता उसी साल विधायक बने थे। इस मामले में सवाल उठा कि क्या सिर्फ उम्र के अंतर को आधार बनाकर आपत्ति आगे बढ़ाई गई। निजामुद्दीन इससे पहले भी पुलिस में शिकायत कर चुके हैं। उनका आरोप था कि उनके नाम का इस्तेमाल कर मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फर्जी प्रपत्र लगाया गया।
  • फुरकान अहमद: पिरान कलियर विधायक फुरकान अहमद का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आपत्ति दर्ज होने की बात सामने आई। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की बात कही है। इससे कांग्रेस का यह सवाल और बड़ा हो गया कि अगर मौजूदा विधायक भी ऐसी आपत्तियों के दायरे में आ सकते हैं तो आम मतदाताओं के मामलों में क्या हो रहा है?

CEO ने निगरानी के लिए क्या कदम उठाए?

कांग्रेस के सवालों के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के कार्यालय ने SIR की निगरानी और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था मजबूत की है। CEO की वेबसाइट पर ड्राफ्ट मतदाता सूची, हटाए गए मतदाताओं की सूची, ASD सूची, फॉर्म-9/10/11 और शिकायत दर्ज करने के साथ उसकी स्थिति देखने की सुविधा दी गई है।

सुनवाई के लिए कैंप: SIR के दूसरे चरण में सुनवाई आसान बनाने के लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। ERO और AERO स्तर पर सुनवाई की जा रही है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी हो रही हैं और जिलों में प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।

9 अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी: दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए 9 IAS/PCS अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी अपने क्षेत्रों में पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।

अपील का रास्ता भी मौजूद: अगर किसी मतदाता को BLO स्तर पर किसी आपत्ति या नोटिस को लेकर परेशानी होती है तो आगे अपील की व्यवस्था है। BLO के बाद AERO, फिर जिला निर्वाचन अधिकारी और उसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी स्तर तक मामला ले जाया जा सकता है।

शिकायत करना आसान या जांच जरूरी?

SIR में किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज करना नियम का हिस्सा है। विवाद इस बात को लेकर है कि आपत्ति आने के बाद उसकी जांच कितनी गंभीरता से होती है।

कांग्रेस चाहती है कि किसी आपत्ति को नोटिस में बदलने से पहले शिकायत और शिकायतकर्ता की जानकारी की शुरुआती जांच हो। उसका कहना है कि गलत शिकायत का बोझ सही मतदाता पर नहीं पड़ना चाहिए।

वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि SIR का मकसद मतदाता सूची को सही करना है और किसी भी मतदाता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया जा रहा है। शिकायत और अपील के लिए भी कई स्तर बनाए गए हैं।

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