जोधपुर : लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शुक्रवार को अरेस्ट कर लिया गया। उन्हें लद्दाख से कड़ी सुरक्षा में जोधपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को लेह से गिरफ्तारी के बाद सिक्योरिटी एजेंसियां वांगचुक को पहले दिल्ली ले गई। वहां से विशेष व्यवस्था के तहत जोधपुर लाया गया। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन से कड़ी सुरक्षा में उन्हें सीधे सेंट्रल जेल पहुंचाया गया।
दरअसल, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और 6वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में 10 सितंबर से भूख हड़ताल और अनशन चल रहा था। 24 सितंबर को ये आंदोलन पहली बार हिंसक हो गया।
इसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 45 लोग घायल हुए। प्रदर्शन का चेहरा रहे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा था- अगर सरकार हमारी बातें अनसुनी करती रहेगी तो बदकिस्मती से ऐसा आगे भी हो सकता है।
प्रदर्शन और हिंसा के बाद लेह में कर्फ्यू प्रदर्शन में मारे गए लोगों की पहचान त्सेवांग थारचिन (46 साल), स्टानजिन नामग्याल (24 साल), जिगमेत दोरजय (25 साल) और रिनचेन ददुल (21 साल) के रूप में हुई थी। शव परिवारों को सौंप दिए गए थे।
हिंसा के दौरान 45 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ऑफिशियल आंकड़ों के मुताबिक, लद्दाख DGP एसडी सिंह जमवाल ने बताया कि 15 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि 30 को मामूली चोटें आई हैं। इसमें प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री जवान शामिल हैं। लेह में अभी BNS की धारा 162 के तहत कर्फ्यू लगाया गया है। सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है।
वांगचुक के NGO के अकाउंट्स की जांच हो रही
CBI ने वांगचुक की NGO हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) के खिलाफ विदेशी फंडिंग मामले में जांच शुरू कर दी है। सरकार ने उनके NGO की विदेशी फंडिंग का लाइसेंस रद्द कर दिया है। उनके NGO HIAL और स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) पर विदेशी चंदा कानून (FCRA) के उल्लंघन का आरोप है।
CBI की टीमें लद्दाख में डेरा डाले हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। CBI की टीम NGO के अकाउंट्स और रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
इस मामले में वांगचुक ने कहा कि करीब 10 दिन पहले CBI की टीम गृह मंत्रालय का आदेश लेकर उनके पास आई थी। इसमें कहा गया था कि उनकी दोनों संस्थाओं ने विदेशी चंदा लेने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं ली। इस पर सोनम का कहना है कि उनकी संस्थाएं विदेशी चंदे पर निर्भर नहीं हैं। दोनों संस्थाएं जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा देती हैं। HIAL में तो छात्रों को प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए स्टाइपेंड भी दिया जाता है।

