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डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत के 135 करोड़ लोगों के नेता : राज्यपाल

  • संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर के अंत्योदय के सिद्धांत को क्रियान्वित करने में जुटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल : बंडारू दत्तात्रेय

चण्डीगढ़ : हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने संविधान निर्माता डा. भीम राव अंबेडकर की 132वीं जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि बाबा साहब ने सदैव दलित-गरीब उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके अंत्योदय के सिद्घांत को ही आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल क्रियान्वित करते हुए देश-प्रदेश को विकास पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं।

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय शुक्रवार को दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल , सोनीपत (डीसीआरयूएसटी) में आयोजित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 132वीं जयंती समारोह में उपस्थित जनसमूह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल दत्तात्रेय ने कहा कि डा. अंबेडकर की शिक्षा व संदेश का अनुसरण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने में जुटे हैं। इसमें अंत्योदय बहुत आवश्यक है, जिसके लिए उन्होंने गरीब वर्ग को स्टार्टअप शुरू करने के लिए दो करोड़ रुपये का ऋण प्रदान करने की योजना शुरू की है। वे भारत को विश्वगुरू बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस दिशा में सबको योगदान देना चाहिए। हमें देश को पुनः: विश्व गुरु बनाने के लिए एकजुटता के साथ आगे बढ़ते हुए हर प्रकार के भेदभाव को मिटाना होगा। बाबा साहब डॉ. अंबेडकर ने भी सर्व समाज के कल्याण के लिए काम किया। वे मात्र दलित नेता नहीं अपितु देश की 135 करोड़ जनता के नेता हैं। इसी भावना के साथ प्रधानमंत्री मोदी भी विकास पथ पर अग्रसर हैं।

बाबा साहब डॉ. अंबेडकर द्वारा दिए गए तीन संदेशों संगठित, संघर्ष व ज्ञान प्राप्ति की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इनको आत्मसात करते हुए ही जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। ज्ञान के महत्व और शक्ति को महसूस करते हुए डा. अम्बेडकर ने संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्च शिक्षा का अध्ययन किया। वह अपने समय के एक दुर्लभ भारतीय राजनेता थे जिन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय, लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स एवं बॉन विश्वविद्यालय में अध्ययन किया था।

राज्यपाल दत्तात्रेय ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब देश अंग्रेजों से आजाद हुआ तो संविधान बनाने करने की चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई भी तैयार नहीं था। आखिर पूरे देश की नजर बाबा साहेब डा. भीम राव अम्बेडकर की तरफ गई। बाबा साहेब ने व्यक्तिगत स्तर पर प्रतिदिन 21-21 घंटे कार्य कर 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में संविधान का प्रारूप तैयार किया। इसलिए ही बाबा साहेब को संविधान का मुख्य निर्माता माना जाता है। आजादी के समय देश विभिन्न संस्कृतियों, जातियों, धर्मों, पंथों, और सम्प्रदायों में बटा हुआ था। देश में उस समय सभी के लिए समान कानून और संविधान देना बहुत ही कठिन था, लेकिन बाबा साहेब ने समतामूलक संविधान की रचना की और देश को एक सूत्र में पिरोया। बाबा साहेब ने समाज में महिलाओं की दशा सुधारने में के लिए प्रयासरत रहे। महिला सशक्तिकरण का हिन्दू संहिता विधेयक पारित करवाने की भी कोशिश की। इसके पारित नहीं होने पर उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।बाबा साहेब डा. अम्बेडकर को आयोग निर्माता भी कहा जाता है। उन्होंने निर्वाचन आयोग, योजना आयोग (नीति आयोग) वित्त आयोगों का गठन किया।

डॉ. अंबेडकर में भारतीयता और राष्ट्रीयता कूट-कूट कर भरी हुई थी

राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हरियाणा सरकार बाबा साहेब के समतामूलक समाज की संकल्पना के लिए पूरी तरह से जुटी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए सबके लिए और विशेष तौर पर समाज के वंचित वर्गों के लिए आवास, राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य उपलब्ध करवाने के लिए अनेकों कार्यक्रम और योजनाएं चलाई जा रही हैं। आज गरीब समाज को डॉ भीमराव अम्बेडकर के बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उनका दर्शन, चिंतन और सिद्धांत युगों-युगों तक हम सबको प्रेरित करता रहेगा। उनके जीवन दर्शन को अपनाकर ही हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जब वे 1977 में जेल मेंं गए तो बााबा साहेब की लिखित किताब को पढक़र निर्णय लिया कि वे उनके आदर्शों पर ही चलेंगे और आज वे इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

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