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MBA की फीस के लिए किडनी तस्करी: डोनर से डील 9 लाख, मरीज से वसूले 60 लाख, एक झगड़े ने उजागर कर दिया काला कारोबार

  • कानपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है, एक तरफ पढ़ाई का जुनून और दूसरी तरफ गरीबी का फायदा उठाने वाले सफेदपोश दरिंदे

कानपुर : कानपुर में मानव अंगों की तस्करी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला आयुष, जो मेरठ में रहकर एमबीए की पढ़ाई कर रहा था, फाइनल ईयर की फीस के इंतजाम के लिए एक ऐसे जाल में फंसा जहां से निकलना नामुमकिन था।

आयुष की किडनी का सौदा 9 लाख रुपये में तय हुआ था, जिसमें से उसे अब तक महज 5 लाख रुपये ही मिले हैं। बाकी के 4 लाख रुपये के लिए जब उसने दबाव बनाया तब इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ। जबकि किडनी लेने वाले मरीज से 60 लाख रुपये तक वसूले गए हैं। यहां किडनी लेने वाले से कई लाख रुपये लिए जाते थे, जबकि किडनी देने वाले को बेहद कम पैसे मिलते थे। मोटी रकम डॉक्टरों, अस्पतालों और बिचौलिए के बीच बांटी जाती थी।

अंगो के सौदे का ​मास्टरमाइंड: वार्डबॉय बना ‘डॉक्टर’

​इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काना बताया जा रहा है। शिवम असल में एक नर्सिंग होम का वार्डबॉय है, लेकिन वह खुद को डॉक्टर बताकर मजबूर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। इसके बाद आहूजा नर्सिंग होम में सर्जरी की जाती और सर्जरी के बाद डोनर और रिसीवर को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता था। आहूजा नर्सिंग होम के डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा और शिवम अग्रवाल फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है। ​पुलिस जांच में सामने आया है कि इस अवैध ट्रांसप्लांट को वैध दिखाने के लिए आयुष को किडनी लेने वाली महिला का ‘दूर का भाई’ बताया गया था। कागजों में हेरफेर कर इसे इमोशनल डोनेशन का रूप दिया गया।

​एक्शन में STF , विजिलेंस , पुलिस और स्वास्थ्य विभाग

​कल रात से ही कानपुर के स्वास्थ्य विभाग, विजिलेंस और एसटीएफ (STF) की टीमों ने शहर के कई नामी अस्पतालों में छापेमारी की है। पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। शहर के बड़े डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। आज होने वाले खुलासे में कई बड़े नामों के चेहरे से नकाब उतर सकता है।

​पीड़ित आयुष की जुबानी

​आयुष ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “मुझे अपनी एमबीए की फीस भरनी थी, घर की स्थिति ठीक नहीं थी। शिवम ने मुझसे वादा किया था कि 9 लाख मिलेंगे। ऑपरेशन हो गया और मेरी किडनी निकाल ली गई, लेकिन अब वो पैसे देने में आनाकानी कर रहा है। मुझे डराया-धमकाया गया और फर्जी कागजों पर दस्तखत कराए गए।”

किडनी रैकेट से उठेगा पर्दा

​यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की महंगाई और अंग तस्करी के संगठित गिरोह का एक भयावह मेल है। क्या शहर के प्रतिष्ठित अस्पताल इस अवैध धंधे में शामिल थे? एसटीएफ की तफ्तीश जारी है और माना जा रहा है कि आज शाम तक कानपुर के इस ‘किडनी रैकेट’ पर से पूरी तरह पर्दा उठ जाएगा।

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