- नारनौल यूथ-कांग्रेस के जिला प्रधान पुनीत बुलाना ने दावा किया है कि बिजली विभाग ने उनके घर का बिल 78 करोड़ 92 लाख रुपये भेजा है
नारनौल : कांग्रेस के नारनौल में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान के घर का 78 करोड़ 92 लाख रुपये का बिल भेज दिया। बिल का मैसेज उसके मोबाइल पर आया। जिसको देखने के बाद उसके होश उड़ गए। वहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि यह बिल सरकार ने जानबूझकर भेजा है।
यूथ कांग्रेस के जिला प्रधान पुनीत बुलाना ने बताया कि उनका गांव हसनपुर है। उन्होंने बिजली का एक एनडीएस दस किलोवाट का कनेक्शन लिया हुआ है। यह कनेक्शन उनकी मां बिमला देवी के नाम से है। इस कनेक्शन से एक छोटी आटा पिसाई की चक्की चलती थी, जो अब दो साल से बंद पड़ी है।
मीटर रीडिंग 6 दिन का दिखाया
कांग्रेस नेता ने बताया कि बीते कल उसके पास निगम का मोबाइल फोन पर मैसेज आया। इस मैसेज को देखकर वे हैरान रह गए। उनके पास निगम का जो मैसेज आया, उसमें उनके मां के के नाम से लिए गए। इस कनेक्शन का छह माह का बिल 78 करोड़ 92 लाख रुपये दिखा दिया।
उन्होंने बताया कि यह बिल गांव हसनपुर निवासी बिमला के नाम जारी किया गया है। विभाग की ओर से जारी बिल में अप्रैल 2026 की बिलिंग अवधि दिखाई गई है, जबकि मीटर रीडिंग मात्र 6 दिनों (15 मार्च से 21 मार्च 2026) की बताई गई है।
यहां देखें बिजली बिल

Image Source : REPORTERबिजली बिल
9,99,99,429 यूनिट बिजली खर्च दिखाया
बिल में दर्ज आंकड़ों के अनुसार कुल देय राशि ₹78,92,75,697 है। इसमें एनर्जी चार्जेस ₹71,69,95,908 और म्युनिसिपल टैक्स ₹1,52,79,316 दर्शाया गया है। सबसे हैरानी की बात यह है कि बिल में बिल्ड यूनिट्स 9,99,99,429 दर्ज हैं, जो किसी भी उपभोक्ता के लिए असंभव संख्या मानी जा रही है।
नहीं भरा तो बिल हो जाएगा 80 करोड़ का
परिवार के अनुसार, इससे पहले उनका बिजली बिल सामान्य आता रहा है। मार्च माह में उन्होंने लगभग ₹63,546 का भुगतान किया था, लेकिन इस बार अचानक करोड़ों रुपये का बिल आने से वे पूरी तरह से परेशान हो गए। बिल पर 8 अप्रैल 2026 अंतिम तिथि दर्ज है। नियत समय पर भुगतान नहीं करने पर सरचार्ज लगने से यह राशि 80 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है।
एंट्री में तकनीकी गड़बड़ी
प्रारंभिक तौर पर यह मामला सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी या डाटा एंट्री में हुई मानवीय गलती का परिणाम माना जा रहा है। हालांकि अभी तक विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर ऐसे मामलों में विभाग बिल को रद्द कर संशोधित बिल जारी करता है, लेकिन इतने बड़े आंकड़े के सार्वजनिक होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

