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हिमंता दूसरी बार असम के CM:2 बीजेपी और 2 सहयोगी दलों से मंत्री बने, सभी ने असमिया में शपथ ली; मोदी-शाह मौजूद रहे

गुवाहाटी : हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बने हैं। गुवाहाटी के खानापारा वेटरनरी कॉलेज ग्राउंड में शपथ ग्रहण कार्यक्रम में गवर्नर लक्ष्मण आचार्य ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई।

हिमंता के अलावा 4 विधायकों भाजपा के रामेश्वर तेली, अजंता नेओम, AGP के अतुल बोरा, BPF के चरण बोरो ने मंत्री पद की शपथ ली है। इनमें दो बीजेपी और 2 सहयोगी दलों से हैं।

शपथ कार्यक्रम में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत बीजेपी-NDA शासित राज्यों के सीएम और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। हिमंता का पूरा परिवार भी कार्यक्रम में मौजूद रहा।

हिमंत बिस्व सरमा कौन हैं?

हिमंत बिस्व सरमा का जन्म 1 फरवरी 1969 को असम के जोरहाट में हुआ था। बाद में उनका परिवार गुवाहाटी के उलुबारी और गांधीबस्ती इलाके में बस गया। उनका परिवार मूल रूप से नलबाड़ी जिले के लतीमा से ताल्लुक रखता है और उनके छह भाई-बहन हैं। राजनीति में औपचारिक रूप से प्रवेश करने से पहले का उनका सफर शिक्षा, छात्र नेतृत्व और वकालत से जुड़ा रहा है। 

1. राजनीति में आने से पहले कैसा था जीवन? 
हिमंत ने अपनी स्कूली शिक्षा 1985 में गुवाहाटी के कामरूप अकादमी स्कूल से पूरी की।  स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने 1985 में प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज (अब कॉटन यूनिवर्सिटी) में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने 1990 में राजनीति विज्ञान में स्नातक और 1992 में इसी विषय में परास्नातक की डिग्री हासिल की। 

इसके बाद उन्होंने बीआरएम गवर्मेंट लॉ कॉलेज गुवाहाटी से एलएलबी की पढ़ाई की। इसके कई साल बाद 2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल: ए स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल एनालिसिस विषय पर अपनी पीएचडी पूरी की।

2. कैसा रहा हिमंत का पेशेवर करियर?
राजनीति के साथ-साथ उन्होंने कानून के क्षेत्र में भी अपना करियर बनाया। 1995 में वे सॉलिसिटर बने और उन्होंने 1996 से लेकर 2001 तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत की। 

3. कैसे राजनीति से जुड़े हिमंत?
हिमंत बिस्व सरमा मुख्यधारा की राजनीति में जगह बनाने से पहले छात्र राजनीति में आए और यहां अपनी प्रभावशाली शुरुआत के जरिए छा गए। बताया जाता है कि अपने बेहतरीन भाषण कौशल और रणनीतिक समझ की वजह से वे प्रभावशाली ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के सदस्य बन गए। स्कूली छात्र होने के दौरान ही वे कॉटन कॉलेज में आसू के मुख्य कार्यालय में नियमित रूप से जाया करते थे। 

1987 में, 18 साल की उम्र में डिग्री के प्रथम वर्ष के छात्र के रूप में उन्हें कॉटन कॉलेज का सहायक महासचिव चुना गया। चुनाव में समर्थन जुटाने के लिए वे उसी साल से कॉलेज हॉस्टल में रहने लगे थे। उन्होंने छात्र राजनीति में अपनी गहरी पैठ बनाई और वे 1988-89, 1989-90 और 1991-92 में तीन बार कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव चुने गए। सरमा आसू से जुड़े ऑल गुवाहाटी स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव भी रहे।

आसू के एक युवा नेता के रूप में उनकी क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक फुटबॉल स्टेडियम के निर्माण के लिए धन जुटाने के लिए छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए दिल्ली का दौरा किया था। वहां उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मुलाकात कर स्टेडियम के लिए फंड मंजूर करवाया था। 

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