- कुलपति बोले- भाषा सीखी या नहीं, लेकिन हम सबने प्रेम की भाषा जरूर सीखी
दैनिक उजाला, मथुरा: जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में आयोजित दस दिवसीय भारतीय भाषा इंटर्नशिप प्रोग्राम 2.0 का भावपूर्ण वातावरण में समापन हो गया। कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु के कोयंबटूर के विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा, ब्रज संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, योग, अध्यात्म, आयुर्वेद और भारतीय जीवन मूल्यों का अध्ययन किया तथा अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम उनके जीवन की अविस्मरणीय सीख बन गया है। समापन समारोह में विद्यार्थियों और आयोजकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
समापन अवसर पर जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि कुछ रिश्तों को किसी नाम की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें केवल हृदय से महसूस किया जाता है। पिछले दस दिनों में विद्यार्थियों के साथ जो आत्मीय संबंध बना है, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो परिवार का कोई सदस्य विदा हो रहा हो। उन्होंने कहा कि चाहे विद्यार्थियों ने हिंदी सीखी हो या नहीं, लेकिन सभी ने प्रेम की भाषा अवश्य सीखी है और यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि है। कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों की सरलता, अनुशासन, सीखने की जिज्ञासा और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान ने सभी का हृदय जीत लिया।
सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इंडियन नॉलेज सिस्टम के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिनव तिवारी ने कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए अत्यंत भावनात्मक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि दस दिन पहले विद्यार्थी अपने सामान के साथ विश्वविद्यालय परिसर में आए थे, लेकिन अब वे अपने साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं, मूल्यों और पारस्परिक सम्मान की अमूल्य पूंजी लेकर जा रहे हैं।
भारतीय भाषा समिति की कंसलटेंट डा. रचना विश्वकर्मा ने कहा कि दस दिवसीय भारतीय भाषा शिविर अनेक महत्वपूर्ण सीख और अनुभवों के साथ सम्पन्न हुआ है।
वीबीयूएसएस की वाइस प्रेसीडेंट प्रो. कुशा तिवारी ने उन्होंने बताया कि कोयंबटूर से आए 50 विद्यार्थी अब वीबीयूएसएस के सांस्कृतिक दूत बन चुके हैं, जो अपने क्षेत्र में भारत की सांस्कृतिक एकता और भाषाई विविधता का संदेश आगे बढ़ाएंगे। वीबीयूएसएस के प्रांत अध्यक्ष डा. कनोडिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक यात्रा रही है।

कोयंबटूर के श्रीकृष्ण आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रियदर्शिनी ने जीएलए विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां का वातावरण एक परिवार जैसा अनुभव कराता है। विश्वविद्यालय का हराभरा परिसर, आत्मीय मेजबानी, विद्यार्थियों और शिक्षकों का सहयोग तथा सीखने का सकारात्मक माहौल अत्यंत प्रभावशाली रहा। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संवाद सत्रों, खेल गतिविधियों और ब्रज क्षेत्र के भ्रमण ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया।
बीएससी सॉफ्टवेयर सिस्टम्स की छात्रा कविया डीएम ने कहा कि वह श्रीकृष्ण आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज तथा जीएलए विश्वविद्यालय की आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें इस विशेष कार्यक्रम का हिस्सा बनने का अवसर दिया। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन आयोजित योग सत्रों ने शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक एकाग्रता और आत्मिक संतुलन को मजबूत किया। श्रीमद्भगवद्गीता पर हुए व्याख्यानों से जीवन मूल्यों, आत्मानुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की गहन समझ विकसित हुई। आयुर्वेद से जुड़े सत्र भी अत्यंत ज्ञानवर्धक रहे। वृंदावन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि, रमणरेती, रसखान समाधि और विभिन्न संग्रहालयों की यात्राएं उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहीं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने जीएलए विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभागों, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, शोध सुविधाओं तथा नवाचार केंद्रों का भ्रमण किया। विशेष रूप से दृष्टि फोटोग्राफी क्लब की गतिविधियों ने विद्यार्थियों को काफी प्रभावित किया। क्लब के मेंटर फैजुल हसन ने प्रतिभागियों एवं सहयोगी स्टाफ सदस्यों को सम्मानित किया। समापन समारोह में वीबीयूएसएस के मंत्री डा. प्रहलाद सिंह, ब्रज प्रांत सहमंत्री डा. भोले सिंह, उप्र. ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, तथा श्रीकृष्ण आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज के साथ आए स्टाफ सदस्य डा. ए. स्वीटी समनियाल, डा. विनोथ कन्ना ए और डा. एस. सिवनेश्वरन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

