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Fri. Aug 14th, 2026

मथुरा में एक्सईएन गौरव के लिए हर उपभोक्ता देवता, दूसरे क्षेत्रों में फोन तक नहीं उठने से उपभोक्ता परेशान

-चंद्र प्रकाश पांडेय

दैनिक उजाला, मथुरा : बिजली विभाग में उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के फोन न उठाने और शिकायतों पर समय से कार्रवाई न होने की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन विद्युत वितरण खंड मथुरा प्रथम के अधिशासी अभियंता गौरव कुमार की कार्यशैली इससे अलग नजर आती है। उनका कहना है कि उपभोक्ता चाहे दिन में फोन करे या देर रात, फोन कॉल हो या व्हाट्सऐप संदेश, हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और उसका समाधान कराने का प्रयास किया जाता है। यही वजह है कि उनके कार्यक्षेत्र से बाहर के उपभोक्ता भी अपनी बिजली संबंधी समस्या लेकर उनसे संपर्क करते हैं।

एक्सईएन गौरव कुमार न केवल ईडीडी प्रथम के 12 बिजलीघरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, बल्कि जिले के नोडल एक्सईएन की जिम्मेदारी भी उनके पास है। जिले में करीब 98 बिजलीघरों की व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी उनकी भूमिका रहती है। ऐसे में उनके पास आने वाली शिकायतें केवल मथुरा प्रथम के उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहतीं। गोवर्धन, लक्ष्मीनगर, मांट, कोसी-छाता सहित जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से भी उपभोक्ता बिजली संबंधी समस्या को लेकर उनसे संपर्क करते हैं।

गर्मी में सैकड़ों फोन, फिर भी शिकायतों को नहीं मानते बोझ

गौरव कुमार का कहना है कि गर्मियों के मौसम में दिन और रात मिलाकर प्रतिदिन सैकड़ों फोन आते हैं। बिजली की अधिक मांग के कारण ओवरलोडिंग, बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं का फोन आना स्वाभाविक है। कई बार सभी कॉल का तत्काल जवाब देना संभव नहीं हो पाता, लेकिन कोशिश रहती है कि किसी भी उपभोक्ता को जवाब मिले और उसकी समस्या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचे।

उन्होंने बताया कि किसी क्षेत्र में बिजली की समस्या की जानकारी मिलते ही वह सबसे पहले संबंधित लाइनमैन से संपर्क कर समस्या दूर कराने के लिए कहते हैं। इसके बाद संबंधित जेई को भी मामले से अवगत कराया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर एसडीओ से भी बात की जाती है। उनका कहना है कि शिकायत को केवल आगे बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समस्या के समाधान तक उस पर नजर रखना जरूरी है।

‘मेरे लिए हर उपभोक्ता देवता’

एक्सईएन गौरव कुमार कहते हैं कि जिस प्रकार एक दुकानदार के लिए उसका ग्राहक देवता होता है, उसी प्रकार एक अधिशासी अभियंता के लिए हर बिजली उपभोक्ता देवता है। उन्होंने कहा कि वह उपभोक्ता की समस्या को अपनी समस्या मानकर सुनने और उसके समाधान का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि बिजली विभाग में काम करते हुए उनके लिए उपभोक्ता की पहचान महत्वपूर्ण नहीं है। कोई किसान है, किसान नेता है, व्यापारी है या सामान्य नागरिक—यदि वह बिजली का उपभोक्ता है और उसे कोई समस्या है तो उसकी शिकायत उनके लिए समान प्राथमिकता रखती है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों से जुड़े लोगों से भी उन्होंने उपभोक्ता के रूप में मिलकर उनकी बिजली संबंधी समस्याओं को समझा है और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई कराई जाती रही है।

जिले के किसी भी कोने से आए शिकायत, समाधान का प्रयास

गौरव कुमार के अनुसार ऐसा कोई नियम नहीं है कि केवल ईडीडी प्रथम क्षेत्र के उपभोक्ताओं की ही शिकायत सुनी जाएगी। जिले के किसी भी क्षेत्र से कोई उपभोक्ता फोन करता है तो उसकी समस्या को गंभीरता से लिया जाता है। कई बार दूसरे क्षेत्रों के उपभोक्ता भी सीधे उनसे संपर्क कर लेते हैं। उनका कहना है कि जहां तक संभव होता है, संबंधित क्षेत्र के अधिकारी और कर्मचारियों से बात कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाता है।

उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था में फॉल्ट और ट्रिपिंग जैसी समस्याएं विशेषकर गर्मियों में अधिक सामने आती हैं। ऐसे समय में उपभोक्ता परेशान होता है और उसकी पहली कोशिश होती है कि किसी जिम्मेदार अधिकारी तक उसकी बात पहुंचे। इसलिए अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि वह उपभोक्ता की बात सुने और उसे उचित स्तर तक पहुंचाए।

‘फोन देर से उठे तो भी जवाब जरूर मिलता है’

एक्सईएन ने कहा कि गर्मियों में फोन कॉल की संख्या बहुत अधिक होने के कारण कई बार किसी कॉल का तत्काल जवाब देना संभव नहीं हो पाता। इसके बावजूद प्रयास रहता है कि छूटी हुई कॉल या व्हाट्सऐप संदेश का जवाब दिया जाए। उन्होंने कहा कि जवाब मिलने में कभी-कभी समय लग सकता है, लेकिन उपभोक्ता को जवाब न मिले, ऐसा उनका उद्देश्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं का सहयोग भी जरूरी है। फॉल्ट, ट्रिपिंग या अन्य तकनीकी समस्या की सूचना समय से मिलने पर संबंधित कर्मचारी को मौके पर भेजकर समस्या के समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

व्यवस्था सुधार में संवाद को मानते हैं जरूरी

गौरव कुमार का कहना है कि बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संवाद जितना बेहतर होगा, समस्याओं का समाधान उतनी ही तेजी से हो सकेगा। उपभोक्ता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी शिकायत सुनी जाएगी और अधिकारी उस पर कार्रवाई करेंगे। इसी सोच के साथ वह फोन, व्हाट्सऐप और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से आने वाली शिकायतों को प्राथमिकता देने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि किसी भी उपभोक्ता को यह महसूस न हो कि उसकी शिकायत छोटी है या उसकी सुनवाई नहीं होगी। बिजली व्यवस्था में कई बार तकनीकी कारणों से तत्काल समाधान संभव नहीं होता, लेकिन शिकायत के बाद संबंधित कर्मचारी को सूचना देकर समस्या के समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू करना जरूरी है।

दूसरे क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की शिकायत—फोन तक नहीं उठते, समाधान के लिए बिजलीघर जाने की सलाह

जिले के गोवर्धन, लक्ष्मीनगर, मांट, कोसी-छाता एवं शहर के विभिन्न क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की ओर से अधिकारियों के फोन न उठाने को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार अधिकारी फोन उठा भी लेते हैं तो समस्या सुनने के बजाय उन्हें सीधे बिजलीघर जाने की सलाह दे दी जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब अधिकारी से फोन पर भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है तो वह अपनी शिकायत लेकर आखिर कहां जाएं। उपभोक्ताओं का कहना है कि ऐसी स्थिति में बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उच्चाधिकारियों को संबंधित क्षेत्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

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