नई दिल्ली : गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कांग्रेस के वंदे मातरम के सिर्फ शुरुआती दो पैरा गाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा- कांग्रेस एक बार फिर तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रही है।
शाह ने कहा कि कांग्रेस ने 1937 में मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटने का फैसला लिया था। इसके कारण देश का बंटवारा हुआ।
दरअसल, कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने बुधवार को तय किया था कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 पैरा में से सिर्फ शुरुआती दो पैरा गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 के अपने पुराने फैसले का हवाला दिया है।
नितिन नबीन ने कहा था- कांग्रेस अब नई मुस्लिम लीग बन गई
शाह से पहले BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी कांग्रेस के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय गीत का अपमान किया है। कांग्रेस अब नई मुस्लिम लीग बन गई है।
नबीन ने कहा कि यह फैसला उन शहीदों का अपमान है, जिन्होंने आजादी की लड़ाई के दौरान इस गीत को अपने मन में रखकर देश के लिए बलिदान दिया। उन्होंने 15 अगस्त को कांग्रेस कार्यालय में वंदे मातरम के पूरे संस्करण को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया।
15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में कार्यक्रम के बाद विवाद हुआ
वंदे मातरम को लेकर पूरा विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह बाद शुरू हुआ। भाजपा ने सोनिया गांधी पर कांग्रेस मुख्यालय के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम गीत रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का वीडियो शेयर किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान पूरा वंदे मातरम गाया जा रहा था। कुछ शुरुआती पंक्तियों के बाद ही सोनिया इसे लेकर असहज होने लगीं। उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया। राहुल भी पूरे गायन के दौरान परेशान दिखे।

दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान झंडे के दाईं ओर खड़गे और सोनिया, बाईं ओर राहुल गांधी खड़े दिखे।
कांग्रेस ने कहा था- कांग्रेस मुख्यालय पर पूरा वंदे मातरम गाया गया
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूरे मामले पर कांग्रेस का पक्ष रखा था। उन्होंने कहा- वंदे मातरम रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे, इसलिए सोनिया गांधी कह रही थीं कि उनके लिए कुर्सी लाकर वहां रख दीजिए।
जयराम रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय पर वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया गया था और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सोनिया के इशारे को वंदे मातरम रोकने की कोशिश बताना गलत है।
जयराम बोले- 1937 से कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाने की परंपरा
जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। बैठक में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और सी राजगोपालाचारी जैसे नेता मौजूद थे।
रमेश ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तय किया गया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम की शुरुआती पंक्तियां गाई जाएंगी। तब से कांग्रेस के अधिवेशनों और कार्यक्रमों में इन्हीं पंक्तियों का इस्तेमाल होता रहा है।
29 जुलाई को नया कानून बना, वंदे मातरम के अपमान पर 3 साल सजा
वंदे मातरम को लेकर यह विवाद ऐसे समय हुआ है, जब संसद ने हाल ही में इसे कानूनी संरक्षण देने वाला नया कानून पास किया है। इसके तहत वंदे मातरम को ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी संरक्षण मिला है। जानबूझकर इसके अपमान या गायन में रुकावट डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

