नई दिल्ली : तिहाड़ जेल में बंद कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया। न्यूज एजेंसी ANI के सूत्रों के मुताबिक उन्हें मृत अवस्था में सफदरजंग अस्पताल में में लाया गया था।
उन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के तीन में से दो मामलों में दोषी ठहराया गया था और एक केस में बरी कर दिया गया था। वे तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

सज्जन कुमार को 12 फरवरी 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोषी ठहराया था।
सज्जन कुमार- 1980 में पहली बार दिल्ली के सांसद बने
सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। वे मैट्रिक तक पढ़े थे। उनकी तीन बच्चे हैं। उन्होंने 1977 में दिल्ली नगर निगम पार्षद के तौर पर राजनीति शुरू की।
बाद में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के महासचिव बने। 1980 में पहली बार बाहरी दिल्ली से सांसद चुने गए। 1991 और 2004 में भी इसी सीट से सांसद रहे। संसद में उन्होंने शहरी विकास और सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना से जुड़ी समितियों में काम किया।
1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों ने सज्जन कुमार के राजनीतिक जीवन को प्रभावित किया। दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट से उम्रकैद मिलने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। फरवरी 2025 में एक अन्य 1984 दंगा हत्या मामले में भी उन्हें उम्रकैद हुई।
पिता-पुत्र की हत्या समेत 2 मामलों में दोषी
दिल्ली कैंट की पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जलाने के मामले में सज्जन कुमार दोषी पाए गए। दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
सितंबर 2023 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुल्तानपुरी में 3 सिखों की हत्या के मामले में उन्हें बरी कर दिया। CBI की गवाह चाम कौर ने आरोप लगाया था कि सज्जन भीड़ को भड़का रहे थे।
1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या हुई थी। 12 फरवरी 2025 को सज्जन कुमार को इस मामले में दोषी ठहराया गया और 25 फरवरी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
1984 सिख विरोधी दंगों में करीब 3500 लोगों की मौत

1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख बहुल इलाकों में दंगे हुए थे। इसमें हजारों लोग मारे गए थे।
31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1 नवंबर से दिल्ली समेत कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के थे। दिल्ली में करीब 2700 और देशभर में लगभग 3500 लोगों की मौत हुई। मई 2000 में जीटी नानावटी कमीशन बना। इसकी सिफारिश पर 24 अक्टूबर 2005 को CBI ने केस दर्ज किया।
2010 में ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार समेत कई आरोपियों को समन किया। 2013 में सज्जन कुमार को बरी किए जाने के बाद CBI ने हाईकोर्ट में अपील की। 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच सिखों की हत्या के मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई। दंगों के 21 साल बाद 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में माफी मांगते हुए कहा था कि इस घटना से उनका सिर शर्म से झुक जाता है।

