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ईरान बोला- होर्मुज तभी खुलेगा, जब अमेरिका अपना रवैया सुधारेगा:उसने बातचीत में धोखा दिया; ट्रम्प ने एक बार फिर होर्मुज को अमेरिकी इलाका बताया

ईरान ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट तभी खोला जाएगा, जब अमेरिका अपना रवैया सुधारेगा और किए गए वादे पूरे करेगा। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ मोहसिन रेजाई ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बातचीत में धोखा दिया है।

रेजाई ने कहा कि अमेरिका पहले अपनी जिम्मेदारियां पूरी करे, उसके बाद ही होर्मुज खोलने पर बात होगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अमेरिकी आर्थिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी नया अमेरिकी इलाका बताया गया है। ट्रम्प इससे पहले 18 अगस्त को भी होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की बात कह चुके हैं। ईरान ने ट्रम्प के इस दावे को खारिज किया है।

ट्रम्प ने शनिवार देर रात ट्रुथ सोशल पर होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी हिस्सा बताने वाला पोस्ट शेयर किया।

ट्रम्प ने शनिवार देर रात ट्रुथ सोशल पर होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी हिस्सा बताने वाला पोस्ट शेयर किया।

रेजाई बोले- ट्रम्प के हमले से परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ सकती है

रेजाई ने कहा कि ट्रम्प के ईरान पर हमले से दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर डर और बढ़ गया है। उनका कहना है कि अब दूसरे देशों को भी लग सकता है कि बिना परमाणु हथियार के वे सुरक्षित नहीं हैं।

रेजाई ने कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक अपने परमाणु कार्यक्रम की जांच भी कराता रहा है। इसके बावजूद अमेरिका ने उस पर हमला किया।

उन्होंने कहा कि इससे दुनिया के दूसरे देशों में परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा बढ़ सकती है। रेजाई के मुताबिक, अमेरिका की कार्रवाई ने परमाणु सुरक्षा मजबूत करने के बजाय उल्टा खतरा बढ़ा दिया है।

होर्मुज स्ट्रेट पर किसका अधिकार है?

होर्मुज स्ट्रेट का उत्तरी हिस्सा ईरान के पास है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसंदम क्षेत्र से लगता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज इसी रास्ते से अरब सागर और फिर हिंद महासागर की ओर जाते हैं।

इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि कई देशों के लिए अहम समुद्री मार्ग है। अमेरिका यहां अपने युद्धपोत और नौसैनिक बल तैनात रखता है ताकि समुद्री व्यापार और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।

खाड़ी देशों से दुनिया को भेजे जाने वाले करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से होती है।

फरवरी में अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने से पहले हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से होकर गुजरता था। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सप्लाई काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है।

ईरानी राष्ट्रपति बोले- युद्ध नहीं बातचीत से समाधान चाहते हैं

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। वह बातचीत के जरिए समस्या का हल निकालना चाहता है।

पजशकियान ने कहा कि ईरान किसी के दबाव में नहीं आएगा, लेकिन ताकत और समझदारी से बातचीत कर समाधान निकाला जा सकता है।

अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव के बीच हुए समझौते में ईरान ने एक भी शर्त नहीं छोड़ी है। उनके मुताबिक, ईरान की सुरक्षा परिषद में सभी पक्षों ने इस समझौते को सही रास्ता माना था।

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