दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय एफडीपी में पेन स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका के प्रोफेसर एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक ने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, छात्र-केंद्रित मूल्यांकन तकनीकों और कक्षा में प्रभावी जुड़ाव बढ़ाने की रणनीतियों की जानकारी दी गई। अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद् के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षा को परिणाम-आधारित एवं संवादात्मक बनाने के साथ शिक्षण की गुणवत्ता और शोध संस्कृति को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान पेन स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका के शिक्षा नीति अध्ययन विभाग के प्रमुख एवं सीएसएचई के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. केविन किंसर ने स्मार्ट मॉडल के आधार पर सटीक एवं स्पष्ट शिक्षण परिणाम (एसएलओ) तैयार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि शिक्षक अपने पाठ्यक्रम के उद्देश्यों को किस प्रकार मापने योग्य, व्यावहारिक और समयबद्ध बना सकते हैं। साथ ही, विद्यार्थियों की सीखने की विविध क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए दृश्य, श्रव्य, पठन-लेखन और व्यावहारिक तकनीकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया गया, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी अपनी स्वाभाविक क्षमता के अनुरूप बेहतर ढंग से ज्ञान अर्जित कर सके।
मूल्यांकन प्रणालियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने रचनात्मक (फॉर्मेटिव) और योगात्मक (समेटिव) मूल्यांकन के बीच संतुलन स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि कक्षा में प्रश्नोत्तरी, मतदान और दैनिक चर्चाओं के माध्यम से किया जाने वाला रचनात्मक मूल्यांकन विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया में निरंतर सुधार का अवसर देता है, जबकि योगात्मक मूल्यांकन सत्र के अंत में विद्यार्थी की समग्र उपलब्धि का आकलन करता है। इसके साथ ही, विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से विकसित करते हुए पूर्ण रूप से स्वतंत्र एवं कुशल बनाने के लिए स्पष्ट दक्षता मापदंड का ढांचा भी प्रस्तुत किया गया।
एफडीपी सत्रों के दौरान डॉ. किंसर ने अध्यापकों के सामने शिक्षण क्षेत्र में आने वाली विभिन्न समस्याओं एवं व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान भी प्रस्तुत किए। उन्होंने अपने समृद्ध शैक्षणिक अनुभव के आधार पर शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि पाठ्यक्रम में रणनीतिक बदलाव कर पठन-पाठन को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान ही प्रोफेसर केविन किन्सर और उनकी पत्नी प्रोफेसर जूली अर्बन ने जीएलए के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, मुख्य वित्त अधिकारी डॉ. विवेक अग्रवाल तथा प्रोफेसर प्रमोद जोशी से औपचारिक मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने जीएलए के शैक्षणिक स्तर की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि विश्वविद्यालय पहले से ही कई ऐसे मॉडल एवं प्रणालियों का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहा है, जो अमेरिका की पेन स्टेट यूनिवर्सिटी तथा अन्य शीर्ष अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में अपनाए जाते हैं।
कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि जीएलए विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल नवाचार और टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल टूल्स और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रभावी समावेश न केवल शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बनाता है, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की शैक्षिक एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए भी तैयार करता है। वहीं, डीन एकेडमिक्स प्रो. आशीष शर्मा ने विश्वविद्यालय की शैक्षिक उपलब्धियों, चल रही शोध गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
इस संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संयोजन बायोटेक्नोलॉजी विभाग की डॉ. रूही सिक्का, एकेडमिक सक्सेस सेंटर की डायरेक्टर डॉ. हिमानी सिंह और सीएसई विभाग की डॉ. रोहिणी रैना द्वारा किया गया। कुल मिलाकर यह चार दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम विश्वविद्यालय के शैक्षिक एवं शोध वातावरण को सशक्त बनाने, शिक्षकों की आधुनिक शिक्षण क्षमता विकसित करने तथा विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी एवं परिणाम-आधारित शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

